काबुल. तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान ने अपने कमांडर की हत्या के बाद पाकिस्तान के खिलाफ ऐलान-ए-जंग कर दिया है. टीटीपी ने एक बयान जारी कर हाल में ही मारे गए अपने कमांडर उमर खालिद खुरासानी की जमकर तारीफ भी की है. अफगानिस्तान और पाकिस्तान में सक्रिय टीटीपी ने बताया है कि “शांति वार्ता” के दौरान पाकिस्तान के हमले में चार लोग मारे गए हैं. 

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इस आतंकी संगठन ने पाकिस्तानी सेना के खिलाफ फिर से हमले शुरू करने का ऐलान किया है. आज ही वजीरिस्तान में हुए आत्मघाती हमले में पाकिस्तानी सेना के चार जवान मारे गए हैं. टीटीवी ने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा है कि हम तथाकथिक डूरंड लाइन के दोनों ओर इस्लामिक अमीरात की स्थापना करेंगे.

आतंकी समूह के एक बयान के मुताबिक़ खुरासानी ने डुरंडू लाइन के आसपास अपना कथित आंदोलन तेज कर दिया था, जिसे 7 अगस्त की शाम को निशाना बनाया गया. तालिबान पाकिस्तान ने, हालांकि अपने बयान में कहा कि अपने एक बड़े नेता को खोने के बाद भी उनकी गतिविधियों जारी रहेंगी. आतंकी समूंह ने अपने बयान में कहा कि जिस तरह उसने सीमा की उस तरफ अफ़ग़ानिस्तान में अपने दुश्मनों को हराया है, उसी तरह वे सीमा की दूसरी तरफ भी वो अपने दुश्मनों को हराएंगे.

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ख़ास बात यह है कि खालिद खोरासानी ने ही तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान की स्थापना की थी और उनके मारे जाने के बाद माना जा रहा है कि देश में टीटीपी का नामो-निशान ख़त्म हो जाएगा. 45 वर्षीय खोरासानी पाकिस्तान के ही खैबर-पख्तूनवा का रहना वाला था जिसने अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद तहरीक-ए-तालिबान अफ़ग़ानिस्तान में शामिल हो गया था. 

पाकिस्तान ट्रीब्यून के मुताबिक़ 1996 में अफ़ग़ानिस्तान पर तालिबानी क़ब्ज़े के बाद जब अमेरिका ने तालिबान को सत्ता से मार भगाया तब खालिद खोरासानी 2002 में पाकिस्तान लौट गया और अपने कुछ तालिबानी साथियों के साथ मिलकर टीटीपी यानि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान की स्थापना की और सरकार के ख़िलाफ़ जंग लड़ने का ऐलान किया.

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हालांकि बाद में आपसी विवादों के बाद खोरासाना ने टीटीपी छोड़ दिया. उन्हें राजनीतिक नेतृत्व को निशाना बनाने, खैबर के राजनेताओं और तत्कालीन फाटा – फेडरली एडमिनिस्टर्ड ट्रायबल एरिया में अन्य जगहों पर जबरन वसूली करने में सबसे घातक माना जाता था. वो टीटीपी के उन परिचालन नेताओं में से था जिन्होंने सरकारी संस्थानों के खिलाफ युद्ध छेड़ा. दरअसल, पाकिस्तान सरकार और टीटीपी में शांति समझौते पर बातचीत चल रही है. माना जा रहा था कमांडर की मौत के बाद बातचीत प्रभावित हो सकती है लेकिन आतंकी समूह के नेताओं ने कहा कि इससे शांति समझौते प्रभावित नहीं होंगे.