हम दिवाली मनाने के लिए आज सुबह ही मरुधर एक्सप्रेस से अपने गांव निकलने वाले थे, लेकिन ट्रेन 12 घंटे लेट होने के कारण हमने शनिवार सुबह जाने का फैसला किया। कल शाम ही पापा ने फोन कर ट्रैवलिंग के बारे में पूछा था।

पापा दो महीने पहले  आए थे। हमारा छठ पूजा पर मिलने का कार्यक्रम था। उन्होंने कहा था कि गांव में सब एक साथ छठ पूजा करेंगे, लेकिन आज सुबह 10 बजे जब चाचा ने फोन कर हादसे के बारे में बताया तो ऐसा लगा कि हमारी दुनिया ही उजड़ गई। मैं जैसे-तैसे अपनी मां को संभाल रहा हूं। अब हम शाम को मण्डोर एक्सप्रेस से गांव जा रहे हैं।


अरुणाचल प्रदेश में हेलिकॉप्टर हादसे में जान गंवाने वाले भारतीय वायुसेना में मास्टर वारंट ऑफिसर अनिल कुमार सिंह के बड़े बेटे अनूप कंचन ने  बातचीत में भारी मन से ये शब्द कहे। सिंह बैरकपुर में पदस्थापित थे, लेकिन पत्नी, दो बेटे, एक बेटी और पुत्रवधू के साथ उनका पूरा परिवार जोधपुर में शिकारगढ़ स्थित आशापूर्णा नैनो कॉम्पलेक्स में रह रहा है।

हैलिकॉप्टर के गनर अनिलसिंह की हादसे में मौत की सूचना के बाद एयरफोर्स ने जोधपुर एयरबेस को सूचित किया। यहां एयरफोर्स के अधिकारी व कार्मिक अनिलसिंह के परिवार से मिलने पहुंचे और उन्हें ढाढस बंधाया।

जोधपुर में ही बस गया है परिवार

बिहार स्थित छपरा के पास मुबारकपुर के निवासी अनिल का जोधपुर में 2008 में स्थानांतरण हुआ था। उनका परिवार 2009 में यहां आ गया था। तब से वे जोधपुर में रह रहे हैं। अनूप ने कहा, पापा को जोधपुर इतना भा गया कि उन्होंने यहीं बसने का मानस बना लिया। अभी नैनो कॉम्पलेक्स में किराये पर रहे हैं, लेकिन पीछे की गली में हमारा अपना मकान बनकर तैयार हो गया है। पापा से मिल कर दिवाली के बाद मकान के मुहूर्त की तिथि तय करनी थी, लेकिन ईश्वर को कुछ और ही मंजूर था।


भरा-पूरा परिवार

हादसे के शिकार 56 वर्षीय अनिल के परिवार में पत्नी मीनादेवी गृहणी है। बड़ा बेटा अनूप होटल में आईटी मैनेजर है। उसकी शादी हो चुकी है। छोटा बेटा अनुज गोवा में निजी कम्पनी में कार्यरत है। बेटी अनुपमा रातानाडा स्थित स्कूल में पढ़ाती है। पूरा परिवार रात को मण्डोर एक्सप्रेस से दिल्ली के लिए रवाना हो गया। वहां से वे पटना जाएंगे। उसके बाद पैतृक गांव मुबारकपुर जाएंगे, जहां अनिल का अंतिम संस्कार किया जाएगा।