अमरीकी और नाटो सैनिकों की वापसी के बाद अफगानिस्तान में एक नए अध्याय की शुरुआत हो चुकी है। अब काबुल एयरपोर्ट भी तालिबानियों के कब्जे में है। आज सालों बाद बैगर किसी विदेशी ताकतों की मौजूदगी में अफगानिस्तान की सुबह हुई। अमरीका करीब 20 सालों तक अफगानिस्तान में सैन्य गतिविधियों को अंजाम देने के बाद वापस लौट चुका है। जिसके बाद तालिबान अफगानिस्तान में सरकार गठन की तैयारियों में जुट गया है। 

तालिबान लगातार दूसरे देशों के प्रति अपने संबंधों को लकर बात कर रहा है और भारत के साथ भी मैत्रीपूर्ण रिश्ते कायम करना चाहता है। इस दौरान तालिबान ने कश्मीर को लेकर अहम बयान दिया है। तालिबान ने कहा है कि हम कश्मीर के मामले में हस्तक्षेप नहीं करेंगे। गौरतलब है कि अनस हक्कानी, हक्कानी नेटवर्क के संस्थापक जलालुद्दीन हक्कानी के सबसे छोटे बेटे हैं। तालिबानी नेता अनस हक्कानी ने कहा कि कश्मीर हमारे अधिकार क्षेत्र का हिस्सा नहीं है और हस्तक्षेप नीति के खिलाफ है। हम अपनी नीति के खिलाफ कैसे जा सकते हैं? इस बयान के बाद अफगानिस्तान में तालिबान का राज लाने के पीछे सबसे बड़ी भूमिका निभाने वाले पाकिस्तान को झटका लगा है।

अनस हक्कानी ने भारत के साथ अच्छे संबंध स्थापित करने की बात दोहराते हुए कहा कि हम जैश और लश्कर को कश्मीर मसले पर समर्थन नहीं देंगे। हम नहीं चाहते कि कोई हमारे बारे में गलत सोचे। यह महज एक प्रोपेगेंडा है। भारत ने 20 सालों तक हमारे दुश्मन की मदद की, मगरहम सब कुछ भूलकर रिश्ते को आगे बढ़ाने के लिए तैयार हैं।