दिल्ली में हार के बाद सार्वजनिक तौर पर पहली बार भाजपा के पूर्व अध्यक्ष व केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्वीकार किया कि उनका दिल्ली चुनावों में 45 सीटें प्राप्त करने का आंकलन गलत साबित हुआ। उन्होंने कहा, मेरा आंकलन 45 सीटों का था। यह गलत साबित हुआ। शाह ने कहा भाजपा भले ही हार गई हो, लेकिन उसने 'अपनी विचारधारा का विस्तार किया।' 

उन्होंने कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा नेताओं को 'गोली मारो' और 'भारत-पाकिस्तान मैच' जैसे नफरत भरे भाषण नहीं देने चाहिए थे। बहरहाल, शाह ने कहा कि भाजपा केवल जीत या हार के लिए चुनाव नहीं लड़ती है बल्कि चुनावों के मार्फत अपनी विचारधारा के प्रसार में भरोसा करती है। उन्होंने अपने ईवीएम से करंट लगाने के बयान का तो बचाव किया, लेकिन कहा कि भाजपा नेताओं द्वारा चुनाव प्रचार के दौरान की गईं कुछ टिप्पणियां अनुचित थीं। दिल्ली में आयोजित एक समिट में उन्होंने कहा, भाजपा ने उनसे (नेताओं के विवादित बयानों से) खुद को अलग किया था। उन्होंने कहा कि भाजपा दिल्ली विधानसभा में जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका निभाएगी। भाजपा की दिल्ली विधानसभा चुनावों में करारी हार हुई है। पार्टी को सिर्फ आठ सीटें मिली हैं, जबकि आप को 62 सीटों पर जीत मिली है।

अमित शाह ने जोर दिया कि चुनाव परिणाम संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) पर जनादेश नहीं था। पड़ोसी देश पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धर्म के आधार पर प्रताडि़त अल्पसंख्यकों (गैर मुसलमानों) को भारतीय नागरिकता देने वाले कानून सीएए का बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि हमने धर्म के आधार पर कभी किसी से भेदभाव नहीं किया है। सीएए में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि मुसलमानों की नागरिकता छीन ली जाएगी। उन्होंने कहा कि सीएए की सिर्फ आलोचना न करें, बल्कि इस पर मेरिट के आधार पर चर्चा करें। सीएए ना तो मुसलमान विरोधी है और ना ही यह गैर-अल्पसंख्यकों के खिलाफ है। सीएए पर जारी विरोध-प्रदर्शन पर शाह ने कहा कि हर किसी को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का अधिकार है। लेकिन इस दौरान हिंसा को जायज नहीं ठहराया जा सकता है।

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