वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में बिहार में 17 सीटों पर लड़कर 16 पर जीत हासिल करने वाले जेडीयू ने तब भले ही केन्द्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने से इनकार कर दिया था, पर अब इस पार्टी ने नरेन्द्र मोदी कैबिनेट का हिस्सा बनने का मन बना लिया है। पिछले दो साल में केन्द्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने को लेकर जेडीयू की ओर से किसी बड़े नेता का पहला कोई बयान शनिवार को सामने आया। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह ने साफ-साफ संकेत दिए कि जेडीयू सम्मानजनक हिस्सेदारी के साथ केंद्रीय कैबिनेट में शामिल होगा। 

पटना स्थित जेडीयू मुख्यालय में मीडिया के सवाल पर आरसीपी सिंह ने कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा हमने भी सुनी है। कहा कि जब भी विस्तार हो, जदयू को मंत्रिमंडल में हिस्सेदारी मिलनी ही चाहिए। एनडीए के जितने घटक दल हैं, सबों की हिस्सेदारी सरकार में होनी ही चाहिए, इसमें सवाल कहां से खड़ा होता है। गठबंधन में जितने भी सहयोगी हैं सबों को मान-सम्मान मिलना चाहिए। 

गौरतलब है कि 2019 में जब केंद्रीय मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ था तो जेडीयू को नरेन्द्र मोदी की सरकार में सांकेतिक भागीदारी मिल रही थी। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने तब इस भागीदारी से मना कर दिया था। तभी से जदयू की मांग संख्यात्मक भागीदारी की रही है। खुद तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने मीडिया के समक्ष संख्यात्मक भागीदारी की मांग रखी थी। 

अब जबकि यूपी चुनाव के मद्देनजर केन्द्रीय कैबिनेट के विस्तार की सुगबुगी आरंभ हो चुकी है, उम्मीद की जा रही है कि जेडीयू को उसकी मांग के अनुरूप समानुपातिक हिस्सेदारी मिल सकती है। जदयू कम से कम तीन मंत्री चाहता है, दो कैबिनेट और एक राज्य मंत्री। इसको लेकर आरसीपी सिंह, ललन सिंह, संतोष कुशवाहा और चंदेश्वर चन्द्रवंशी सरीखे सांसदों के नाम भी उछलते रहे हैं। 

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टीम में अभी उनके अलावा 21 कैबिनेट और 9 राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार और 29 राज्य मंत्री हैं। कुछ मंत्रियों के पास कई मंत्रालय होने से मंत्रि परिषद के साथियों की कुल संख्या 54 है। सूत्रों के अनुसार, जिन लोगों को मंत्रिपरिषद के भावी फेरबदल और विस्तार में शामिल किया जा सकता है, उनमें असम के पूर्व मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल, बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी, सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया, बैजयंत पांडा के नाम चर्चा में हैं। इस बार के विस्तार में जेडीयू को भी शामिल करने की स्थितियां बन सकती हैं। मोदी सरकार में अभी भाजपा के सहयोगी दलों से एक भी कैबिनेट मंत्री नहीं है। सहयोगी दलों में अकेले रिपब्लिकन पार्टी के रामदास आठवले राज्य मंत्री हैं। ऐसे में कुछ और सहयोगी दलों को भी विस्तार में जगह दी जा सकती है।