असम में ‘भोगली बिहू’ उत्सव के दौरान नागरिकता संशोधन विधेयक के खिलाफ प्रदर्शन हुए और प्रतीकात्मक रूप से विरोध स्वरूप विधेयक की प्रतियां जलाई गयीं। सुबह के समय पारंपरिक ‘मेजी भेलाघर अग्नि’ के दौरान भी विरोध प्रदर्शनों में कमी नहीं आई। इस दौरान लोग राज्य के सुखद भविष्य के लिए और आने वाले साल में अच्छी फसल के लिए प्रार्थना करते हैं।


बिहू की पूर्व संध्या को उरुका कहते हैं। इस मौके पर बांस, सूखी पत्तियों और लकड़ी के बने ‘बेलाघरों’ में समुदाय के लोग मिलकर भोजन पकाते हैं। उरुका के मौके पर यहां वरिष्ठ वकील अरुप बोरबोरा के आवास पर विधेयक की प्रतियां जलाई गयीं। इस काम में जानेमाने साहित्यकार हिरेन गोहेन और वरिष्ठ पत्रकार मंजीत महंत शामिल रहे जिनके खिलाफ राज्य सरकार ने देशद्रोह का मामला दर्ज किया है।

अंतरराष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार विजेता फिल्मकार जानू बरुआ, गायक पुलक बनर्जी,  एक प्रतिष्ठित अखबार के संपादक प्रशांत राजगुरु, राजनीतिक विश्लेषक हैदर हुसैन, वरिष्ठ अधिवक्ता हफीज राशिद चौधरी तथा नेकिबुर जमान आदि नें इस प्रदर्शन में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि यह विधेयक असमिया लोगों के अस्तित्व पर संकट पैदा करने वाला है। उन्होंने असम की जनता, उनकी भूमि, भाषा, संस्कृति और धरोहर को बचाने के लिए आंदोलन जारी रखने का संकल्प लिया।