अमेरिका हिंद प्रशांत क्षेत्र में भारत की भूमिका को बेहद मजबूत बनाने के पक्ष में है। बाइडन प्रशासन की पूरी कोशिश है कि एक अहम रणनीतिक साझेदार के रूप में भारत, अफगानिस्तान सहित पूरे क्षेत्र में प्रभावी भूमिका निभाए। अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन की भारत यात्रा इस लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण साबित होगी।

जानकारों का कहना है कि अमेरिका जानता है कि इस इलाके में एक मजबूत भारत उसके हित में है। भारत अमेरिका के लिए एक विश्वसनीय साझेदार है। दोनों के बीच व्यापारिक साझेदारी रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ रही है। रणनीतिक और सैन्य स्तर पर सहयोग नए मुकाम पर है। अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता भी साझा रूप से नजर आ रही है।

भारत और अमेरिका दोनों चाहते हैं कि क्वाड का विस्तार हो। साथ ही चीन के बढ़ते दखल पर अंकुश लगे। विवेकानंद फाउंडेशन के सीनियर फेलो पीके मिश्रा का कहना है कि अफगानिस्तान में पाकिस्तान की भूमिका संदिग्ध है। उधर चीन इस इलाके में भारत और अमेरिका दोनों के रणनीतिक हितों के खिलाफ अपना वर्चस्व स्थापित करने का प्रयास कर रहा है। ऐसे में भारत के साथ विश्वसनीय साझेदारी को मजबूत बनाना अमेरिका के पक्ष में है। गौरतलब है कि ब्लिंकन 27 व 28 जुलाई को भारत दौरे पर हैं।

जानकारों का कहना है कि ये यात्रा बहुआयामी होगी। साझा हित और चिंता से जुड़े सभी मुद्दों पर दोनों देश बात करेंगे। भारत और अमेरिका सुरक्षा, रक्षा, आतंकवाद पर लगाम, अफगानिस्तान में शांति, चार देशों के समूह क्वाड, कोरोना महामारी और जलवायु परिवर्तन समेत कई क्षेत्रों में सहयोग और बढ़ाएंगे। अमेरिकी विदेश मंत्री हिंद-प्रशांत क्षेत्र में हो रही प्रगति को लेकर भी चर्चा करेंगे।

पहली बहुपक्षीय वार्ता इस साल अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन की अगुवाई में वर्चुअल की गई थी। इसमें क्वाड के बाकी सदस्य देश भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने शिरकत की थी। क्वाड के विस्तार की योजना में चीन रोड़ा अटकाने की कोशिश कर रहा है। लिहाजा अमेरिका की भूमिका काफी अहम होने वाली है। अमेरिका अन्य देशों को राजी करने में अहम भूमिका निभा सकता है। इस मुद्दे पर ब्लिंकन और भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर की बात हो सकती है।