कोरोना वायरस की वैक्सीन का एकसाथ 30 हजार इंसानों पर शुरू हो रहा है। इसमें लोगों को Moderna Inc की बनाई वैक्सीन दी गई है। यह वैक्सीन उन चुनिंदा कैंडिडेट्स में से है जो कोराना वायरस से लड़ने की रेस के आखिरी चरण में हैं। नैशनल इंस्टिट्यूट्स ऑफ हेल्थ ऐंड और मॉडर्ना इंक की बनाई एक्सपेरमेंटल वैक्सीन वायरस से बचाव कर पाएगी इसकी फिलहाल कोई गारंटी नहीं है। इसलिए यह स्टडी की गई है।
वॉलंटिअर्स को यह नहीं बताया गया है कि उन्हें असली दवा दी जा रही है या डमी। दो डोज देने के बाद उन्हें मॉनिटर किया जाएगा। यह देखा जाएगा कि कि कौन से ग्रुप को इन्फेक्शन होत है। यह स्टडी खासकर ऐसे इलाकों में की गई है जहां अभी भी तेजी से वायरस फैल रहा है। Moderna की पहली स्टेज की स्टडी में 45 वॉलंटिअर्स पर वैक्सीन का असर देखा गया था। इसमें वॉलंटिअर्स के इम्यून सिस्टम में बचाव पैदा हुआ था। बुखार और दर्द जैसे मामूली साइड इफेक्ट्स भी पाए गए थे।
अमेरिका चाहता है कि देश में इस्तेमाल होने वाली वैक्सीन का टेस्ट वह खुद करे। हर महीने एक कैंडिडेट का 30 हजार वॉलंटिअर्स पर टेस्ट होगा। इस टेस्ट में यह भी देखा जाएगा कि ये वैक्सीन कितनी सुरक्षित हैं। इसके बाद वैज्ञानिक इन वैक्सीनों की तुलना करेंगे। अगले महीने Oxford की वैक्सीन का टेस्ट होगा और फिर सितंबर में Johnson & Johnson, अक्टूबर में Novavax की स्टडी होगी। Pfizer Inc. अपने आप 30 हजार वॉलंटिअर्स पर स्टडी करेगा।
अमेरिका की Moderna Inc की mRNA 1273 वैक्सीन के अलावा Oxford University के जेनर इंस्टिट्यूट की वैक्सीन AZD1222 भी इंसानों पर पहले चरण के ट्रायल में सफल रही है। इसे दिए जाने पर वॉलंटिअर्स में ऐंटीबॉडी और Killer T-cells पाए गए हैं। ऑक्सफर्ड की वैक्सीन क उत्पादन भारत में करने के लिए Serum Institute of India ने AstraZeneca के साथ डील की है। वहीं, चीन की CanSino की वैक्सीन ने भी इंसानों पर आखिरी चरण में जाने का दावा किया है।