चीन अपने यहां पर रहने वाले उइगर मुस्लिमों पर शिकंजा कसने से बाज नहीं आ रहा है। इस बार चीन ने कंपनी अलीबाबा की मदद से एक ऐसा सॉफ्टवेयर तैयार किया है, जो चेहरे की थ्रीडी इमेज बनाकर व्‍यक्ति की पहचान करता है। मीडिया रिपोर्ट में इसका खुलासा किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक अलीबाबा कंपनियों ने फेस रिकग्निशन सॉफ्टवेयर के उपयोग का विकल्‍प देकर चीन की मंशा को पूरा करने का काम किया है।

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन की कंपनी अलीबाबा अब वहां पर रहने वाले उइगर मुस्लिमों से अलग व्‍यवहार करने लगी है। इसका इस्‍तेमाल चीन उइगुर मुसलमानों तक पहुंचने के लिए कर रहा है। चीन की सरकार और कंपनी इन लोगों के साथ विवादास्‍पद बर्ताव करने से भी नहीं चूक रही हैं। रिपोर्ट में कंपनी की वेबसाइट का हवाला दिया है। इसमें कहा गया है कि कंपनी की क्लाउड कंप्यूटिंग सर्विस में जाने से इस सॉफ्टवेयर के माध्‍यम से न सिर्फ उइगरों बल्कि दूसरे अल्पसंख्यकों की तस्वीरों और वीडियो के जरिए पहचान की जा सकती है। इसको लेकर अमेरिका की एक रिसर्च कंपनी आईपीवीएम अलीबाबा की वेबसाइट से उइगुर और विशेष जातीय अल्पसंख्यकों के बारे में दी गई पहचान को फिलहाल हटा दिया गया है। इस रिसर्च कंपनी ने अपनी इस रिपोर्ट को साझा भी किया है।

एनवाईटी के मुताबिक अलीबाबा ने इस सॉफ्टवेयर की टेस्टिंग के लिए एक यूजर को चुना था। इसके बाद फिर कभी इसके इस्तेमाल की पेशकश नहीं की गई। आईपीवीएम कंपनी ने ही इस बात की जानकारी दी थी कि चीन की कंपनी हुआवे एक फेस रिकॉग्निशन सॉफ्टवेयर विकसित कर रहा है। ये सॉफ्टवेयर ऑटोमैटिक तरीके से उइगरों की पहचान कर सकेगा और इनकी जानकारी को पुलिस के साथ साझा भी कर सकेगा। हालांकि रिपोर्ट सामने आने के बाद हुआवे ने इस तरह के सॉफ्टवेयर को विकसित करने के आरोपों से साफ इनकार कर दिया था।

गौरतलब है कि चीन की सरकार काफी समय से अपने यहां पर रहने वाले उइगरों पर शिकंजा कड़ा कर रही है। बीते कुछ वर्षों में शिनजियांग प्रांत में रहने वाले उइगुर मुसलमानों को जबरन कैंपों में रखने का आरोप लगा है, जिसको चीन की सरकार मनघंड़ंत बताती आई है। चीन की सरकार अपने इन कैंपों को सुधार केंद्र या रीएजुकेशन कैंप और व्‍यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र बताती रही है। हालांकि पूरी दुनिया के मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का आरोप है कि यहां पर इन लोगों को जबरन ठूंसा गया है।