केंद्र सरकार ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्य सचिव अलापन बंद्योपाध्याय को तलब करने के अपने कदम का बचाव किया और उनके ट्रांसफर के आदेश को संवैधानिक बताया। केंद्र सरकार के सूत्रों ने बताया कि यह आदेश पूरी तरह से संवैधानिक है क्योंकि मुख्य सचिव एक अखिल भारतीय सेवा अधिकारी होते हैं। 

उन्होंने अपने संवैधानिक कर्तव्यों की उपेक्षा की, जिसके परिणामस्वरूप वह प्रधानमंत्री के समक्ष नहीं पेश हुए और न ही पश्चिम बंगाल सरकार का कोई भी अधिकारी प्रधानमंत्री की समीक्षा बैठक में शामिल हुआ। दरअसल, पूर्व मुख्य सचिव अलापन को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए तलब किया गया था क्योंकि वह पिछले सप्ताह चक्रवात यास के बाद समीक्षा बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक प्रस्तुति देने में विफल रहे थे। सूत्रों के मुताबिक वह बिना उचित कारण बताए मुख्यमंत्री के साथ बैठक से निकल गए।

यास तूफान पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बैठक में शामिल न होने वाले पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्य सचिव अलापन बंद्योपाध्याय को दिल्ली तलब किया गया था और उन्हें सोमवार सुबह 10 बजे नार्थ ब्लॉक में डिपार्टमेंट ऑफ पर्नसल एंड ट्रेनिंग को रिपोर्ट करना था, मगर वे नहीं आए। उसके अगले दिन ही उन्होंने अपने पद से रिटायरमेंट की घोषणा कर दी। अलापन बंद्योपाध्याय सोमवार को बंगाल के मुख्य सचिव के पद से सेवानिवृत्त हो गए और अब वह बंगाल सरकार के मुख्य सलाहकार हैं। केंद्र ने तब ममता बनर्जी पर अलापन बंदोपाध्याय को अनुशासनात्मक कार्रवाई से बचाने का आरोप लगाया था।

 

सूत्रों ने कहा कि मुख्य सचिव की सेवानिवृत्ति से पता चलता है कि ममता बनर्जी बैकफुट पर हैं। वह जानती हैं कि मामले के तथ्य मुख्य सचिव के खिलाफ हैं और उनका व्यवहार ऐसा था कि यह सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई को आमंत्रित करेगा क्योंकि वह एक अखिल भारतीय सेवा अधिकारी हैं और यह सुनिश्चित करना उनका कर्तव्य है कि समीक्षा बैठक निर्धारित समय के अनुसार हो। अखिल भारतीय अधिकारियों से राजनीति का हिस्सा होने की उम्मीद नहीं की जाती है। ममता बनर्जी यह सब जानती हैं और उनकी सेवानिवृत्ति उन्हें बचाने के लिए अंतिम बोली है।