उत्तर प्रदेश विधानसभा सभा चुनावों (UP assembly elections) से पहले अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) अंधविश्वास का दामन नहीं छोड़ रहे हैं। दरअसल अखिलेश यादव नोएडा को खुद के लिए अशुभ मानते हैं। ऐसे में पिछले 11 साल से उन्होंने इस धरती पर कदम नहीं रखा है। जब वे मुख्यमंत्री (2012-2017) थे, इन पांच सालों के दौरान एक भी बार उन्होंने नोएडा (Noida) की जमीन पर पैर नहीं रखा। ऐसा ही कुछ इस बार भी हुआ। चुनाव प्रचार के दौरान वे नोएडा पहुंचे, लेकिन जमीन पर कदम नहीं रखा। 

बता दें कि अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) का चुनावी रथ ग्रेटर नोएडा के लुहाली (दादरी) टोल प्लाजा पहुंचा। यहां समाजवादी पार्टी के कई कार्यकर्ता उनके स्वागत के लिए मौजूद थे। कार्यकर्ताओं ने ढोल नगाड़ों के साथ अखिलेश का स्वागत किया, लेकिन वे गाड़ी से नीचे नहीं उतरे। सपा प्रमुख (Akhilesh Yadav) ने अपने रथ की खिड़की खोलकर हाथ हिलाया और दिल्ली की तरफ रवाना हो गए। कार्यकर्ताओं को उम्मीद थी कि अखिलेश नीचे उतरकर उनसे मुलाकात करेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

दरअसल ऐसा कहा जाता है कि जो भी नेता नोएडा का दौरा करता है, उसकी कुर्सी चली जाती है। ऐसा अब तक पांच बार हो चुका है। अखिलेश भी इस अंधविश्वास को मानते हैं। इसलिए अपनी सरकार जाने के बाद भी उन्होंने नोएडा में कदम नहीं रखा। 1980 में एनडी तिवारी (ND Tiwari) नोएडा आए थे और मुख्यमंत्री की कुर्सी गंवा बैठे। इसी तरह, 1988 में वीर बहादुर सिंह (Veer Bahadur Singh) ने नोएडा का दौरा किया, इसके कुछ दिन बाद उनकी कुर्सी चली गई। 1995 में मुलायम सिंह (Mulayam Singh), 1997 में मायावती और 1999 में कल्याण सिंह के साथ भी यही हुआ था। 2011 में भी मायावती नोएडा आईं और 2012 में सत्ता से बाहर हो गईं।