विश्व में कैंसर रोगियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए पचपेड़वा के एक किसान ने ब्लैक राइस की खेती करने का सराहनीय काम किया है। अखिलेश त्रिपाठी ने ब्लैक राइस की खेती शुरू की है। इसको खाने से मधुमेह, कैंसर सहित पेट संबंधी बीमारियों के होने की आशंका कम रहती है।


एक एकड़ में लहरा रही फसल

देवरिया के मूल निवासी अखिलेश त्रिपाठी का फार्म हाउस बलरामपुर के पचपेड़वा ब्लॉक स्थित गोबरी गांव में है। गूगल पर सर्च करके अखिलेश त्रिपाठी ने इसी फार्म में ब्लैक राइस उगाने की योजना बनाई है। त्रिपाठी पहले मणिपुर से ब्लैक राइस के ढाई सौ ग्राम बीज लाए। फिर इसे 10 बिस्वा में रोपकर 65 किलोग्राम धान तैयार किया। अब इस वर्ष उनके एक एकड़ खेत में 'ब्लैक राइस' की फसल लहलहा रही है। इसके अलावा तीन एकड़ में शुगर रोगियों के लिए शुगर फ्री सांभा, तिलकचंदन व काला नमक धान उगाया है। लीक से हटकर खेती कर रहे अखिलेश से अब दूसरे किसान किसानी का गुर सीख रहे हैं।


सुपरफूड है ब्लैक राइस

मेडिकल साइंस की दुनिया में ब्लैक राइस को सुपरफूड की संज्ञा दी गई है। ब्लैक राइस में एंटी ऑक्सीडेंट की मात्रा चाय व कॉफी से अधिक रहती है। इसे खाने से धमनियों में रक्त का प्रवाह साफ रहता है। हृदय रोगियों के लिए संजीवनी है। नियमित ब्लैक राइस खाने वालों को दिल का दौरा आने की संभावना कम हो जाती है। साथ ही कैंसर, ब्लड शुगर व स्मरण शक्ति के रोगियों के लिए भी लाभकारी है।