जदयू के उपाध्यक्ष और राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने सीएए और एनआरसी पर आगे बढ़ने की गृह मंत्री अमित शाह को चुनौती दी है। कहा कि यदि इस पर हो रहे विरोध की आप परवाह नहीं करते तो इसे लागू करने पर आगे बढ़ें। गृहमंत्री लगातार कह रहे हैं सरकार इससे एक ईंच भी पीछे नहीं हटेगी। प्रशांत किशोर ने कहा कि नागरिकों की असहमति को खारिज करना किसी भी सरकार की ताकत को प्रदर्शित नहीं करता। गौरतलब है कि भाजपा की सहयोगी जदयू ने संसद में इस कानून का समर्थन किया था, लेकिन प्रशांत किशोर इसका लगातार विरोध करते रहे हैं।

शाह से बहस के लिए तैयार, जगह और मंच बतायें : अखिलेश 

उधर, समाजवादी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने परोक्ष रूप से केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा कि बहुमत से जनता की आवाज नहीं दबाई जा सकती है। डंके की चोट पर बहस की चुनौती देने वाले को जवाब है कि वह बहस के लिए तैयार हैं। जगह और मंच का चुनाव उनकी पसंद का हो। समाजवादी आंदोलन के प्रखर नेता जनेश्वर मिश्र को उनकी 10वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धाजंलि देने के बाद यादव ने पत्रकारों से कहा कि बड़े पदों पर बैठे लोगों की भाषा भी उसी स्तर की होनी चाहिए। भाजपा नेता ठोक देंगे, जबान खींच लेंगे, बदला लेंगे डंके की चोट पर जैसी भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह धरती मर्यादा पुरूषोत्तम राम और भगवान श्रीकृष्ण की है। मर्यादा का उल्लंघन करने वाली भाषा राजनीति की भाषा नहीं हो सकती है। उन्होंने तल्ख लहजे में कहा कि बहुमत से जनता की आवाज नहीं दबाई जा सकती है। डंके की चोट पर बहस की चुनौती देने वाले को जवाब है कि वह बहस के लिए तैयार हैं। जगह और मंच का चुनाव उनकी पसंद का हो। बहस विकास पर होगी, जब और जहां चाहें बहस कर लें। भाजपा विकास पर बहस से भागती है। वह नोटबंदी, मंदी, अर्थव्यवस्था पर बहस नहीं करती है। 

यादव ने कहा कि सीएए का विरोध केवल समाजवादी पार्टी नहीं कर रही है बल्कि विरोध में नौजवान, महिलाएं सभी बढ़चढ़ कर भाग ले रहे हैं। भाजपाई तो पैसे से रैली में भीड़ लाते हैं। जिन्होंने हमें आजादी दिलाई, सुन्दर संविधान दिया उन्होंने कभी भाषा, धर्म के नाम पर भेदभाव नहीं किया। यह भेदभाव भाजपा करती है। वे बताएं क्या वोट के लिए वे समाज में खाई पैदा करेंगे। ज्ञातव्य है कि सीएए के समर्थन में मंगलवार को लखनऊ में भाजपा की रैली में शाह ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती के अलावा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को सीएए को लेकर बहस की चुनौती दी थी।

मायावती को मंजूर शाह की चुनौती 

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के बारे में किसी भी मंच पर बहस को तैयार हैं। मायावती ने कहा किअति-विवादित सीएए/एनआरसी/एनपीआर के खिलाफ पूरे देश में खासकर युवा और महिलाओं के संगठित होकर संघर्ष व आन्दोलित हो जाने से परेशान केन्द्र सरकार द्वारा लखनऊ की रैली में विपक्ष को इस मुद्दे पर बहस करने की चुनौती को बसपा किसी भी मंच पर व कहीं भी स्वीकार करने को तैयार है।

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