ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट(एआईयूडीएफ) के प्रमुख बदरुद्दीन अजमल ने सोमवार को खुलासा किया कि उनकी पार्टी 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाले 18 दलों के मोर्चे में शामिल होगी। हालांकि एआईयूडीएफ ने पुष्टि की है कि पार्टी 2018 के पंचायत चुनाव में किसी दल से गठबंधन नहीं करेगी। वह अपने दम पर चुनाव लड़ेगी। मीडिया से बातचीत में अजमल ने कहा, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी की मौजूदगी में हुई 4 बैठकों में मैं मौजूद रहा हूं। भाजपा को सत्ता से उखाड़ फेंकने के लिए पूरे देश के 8 मजबूत दलों की कोर कमेटी स्थापित की गई है। यह जानकारी दी गई है कि नोटबंदी की तारीख यानी 8 नवंबर को 18 दलों का मोर्चा देश व्यापी विरोध प्रदर्शन करेगा।

इस बीच अजमल ने भाजपा सांसद कामाख्या प्रसाद तासा को इडियट करार दिया है जिन्होंने कथित रूप से नेहरु और गांधी की तुलना कूड़े करकट से की थी। अजमल ने तासा के बयान को भयानक करार दिया। अजमल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह भी इस तरह से नहीं बोलते हैं। एआईयूडीएफ के सूत्रों ने टाइम 8 को बताया कि 2019 के लोकसभा चुनाव में गठबंधन का कोई बिंदु नहीं है और इसके लिए अभी तक कोई प्लानिंग नहीं की गई है। हालांकि देश में 18 दलों का मोर्चा है और एआईयूडीएफ ने इन दलों से हाथ मिलाया है। आपको बता दें कि हाल ही में असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने अजमल को आरएसएस चीफ मोहन भागवत का छोटा भाई बताया था। अजमल ने गोगोई पर पलटवार करते हुए उन्हें मोहन भागवत का बड़ा भाई बताया था। एआईयूडीएफ चीफ ने गोगोई का आरएसएस का स्लीपर एजेंट करार दिया। गोगोई ने शुक्रवार को दावा किया था कि एआईयूडीएफ का चीफ आरएसएस चीफ मोहन भागवत का छोटा भाई है और उसकी पार्टी भाजपा की बी टीम है। अपने निवास पर शनिवार को अजमल ने कहा, अगर मैं मोहन भागवत का छोटा भाई हैं तो तरुण गोगोई आरएसएस चीफ के बड़े भाई हैं। उन्होंने कहा, अगर एआईयूडीएफ असम में सरकार बदलने के लिए जिम्मेदार है तो गोगोई को यह बताना चाहिए कि भाजपा मणिपुर सहित देश के उन अन्य राज्यों में सत्ता में कैसे आई, जहां पार्टी का कोई अस्तित्व नहीं है। अजमल ने कहा, भाजपा जैसी सांप्रदायिक पार्टी को सत्ता से दूर रखने के लिए उन्होंने कांग्रेस के साथ मजबूत गठबंधन बनाने की कोशिश की थी लेेकिन गोगोई ने हमेशा इसमें मुश्किलें पैदा की। एआईयूडीएफ ने 2013 में धुबरी जिला परिषद के चुनाव में 29 में से 15 सीटें जीती थी । इसके बावजूद वह अपना बोर्ड बनाने में विफल रही थी। 2016 के विधानसभा चुनाव के बाद धुबरी सीट पूर्व कांग्रेसी नेता नजरुल हक ने एआईयूडीएफ के टिकट पर जीती थी। इसके बाद पार्टी जिला परिषद बोर्ड बना पाई।