CAA यानी संशोधित नागरिकता कानून का ​विरोध रूकने का नाम नहीं ले रहा है। इसके खिलाफ एक ओर जहां पूरे देश में कई जगहों पर आवाजें उठ रही है वहीं, अब भाजपा शासित राज्य असम की विधानसभा में भी कांग्रेस और आईयूडीएफ ने मिलकर इसका विरोध किया है। इन दोनों पार्टियों के विरोध प्रदर्शनों की गूंज आज असम विधानसभा में भी सुनाई दी।  आज विपक्षी दल कांग्रेस और एआईयूडीएफ के सदस्यों ने इस कानून के खिलाफ नारेबाजी की जिससे उस वक्त हंगामे की स्थिति बन गई। उस समय राज्यपाल जगदीश मुखी ने अभिभाषण शुरू ही किया था।

आपको बता दें कि असम विधानसभा का यह 1 दिवसीय विशेष सत्र उस संविधान संशोधन विधेयक को मंजूरी देने के लिये बुलाया गया था जिसमें लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में एससी/एसटी आरक्षण को अगले 10 साल तक बढ़ाने का प्रस्ताव है। संसद ने इस विधेयक को पिछले साल 11 दिसंबर को पारित किया था। राज्यपाल मुखी का अभिभाषण शुरू होते ही विधायक रूपन कुर्मी अपने स्थान पर खड़े होकर कहा कि राज्यपाल के भाषण में सीएए या इस कानून के खिलाफ पिछले साल दिसंबर में हुए प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर पुलिस गोलीबारी में मारे गए पांच छात्रों के बारे में कोई जिक्र नहीं है।

इसके साथ ही विपक्षी सदस्यों ने भी कुर्मी का साथ देते हुए सीएए के खिलाफ हाथों में तख्तियां लेकर नारेबाजी शुरू कर दी और वे अध्यक्ष के आसन के पास आकर इन मौतों की जांच कराए जाने की मांग करने लगे। राज्यपाल ने अपना अभिभाषण जारी रखा लेकिन शोरगुल के बीच कुछ भी सुना नहीं जा सका। इस दौरान सत्ता पक्ष में बैठे भाजपा विधायक राज्यपाल के अभिभाषण पर मेजें थपथपा रहे थे। इस बात का संकेत देने के लिये राष्ट्रगान की धुन बजायी गयी कि राज्यपाल जा रहे हैं और अध्यक्ष हितेन गोस्वामी ने घोषणा की कि मुखी के बयान को पढ़ा हुआ माना जाए। गोस्वामी ने इसके बाद सदन की कार्यवाही को विधायकों के लिये आयोजित विशेष चाय सत्र के लिए 45 मिनट के लिये स्थगित कर दिया। कांग्रेस विधायकों ने संवाददाताओं को बताया कि उन्होंने चाय सत्र का बहिष्कार किया है।

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