दोनों राष्ट्रीय पार्टियां असम से अपने प्रत्याशियों की पूरी सूची जारी करने में पहले आप, पहले आप की मुद्रा बनाए हुए हैं। इस बीच धुबड़ी और बरपेटा से कांग्रेस टिकट मांगने वाले  कुछ दावेदार यह जताने में लग गए हैं कि वे खड़े हुए तो एआईयूडीएफ दोनों जगह से जीत जाएगी, वरना भाजपा को हराया नहीं जा सकता है।


राजनीति में यह विचित्र स्थिति कैसे पैदा हुई, इसके पीछे प्रदेश कांग्रेस के एक कद्दावर नेता के मुताबिक एआईयूडीएफ के प्रति पार्टी के ही कुछ नेताओं का व्यामोह हैं। वे चाहते हैं कि एआईयूडीएफ से इस समय गठजोड़ कर लेना चाहिए। वरना अल्पसंख्यक और धर्मनिरपेक्ष मत छितरा जाएंगे।
जबकि यह जगजहिर है कि तरुण गोगोई, रिपुन बोरा और देवब्रत सैकिया से लेकर तमाम बड़े पदाधिकारी इसके मुखर विरोध में हैं। उधर एआईयूडीएफ प्रमुख मौलाना बदरुद्दीन अजमल अभी भी दिल्ली पर आस लगाए बैठे हैं। उनके एक महामंत्री ने तो मीडिया के सामने गोगोई को सबसे बड़ा दुश्मन बताया है।
कांग्रेस अपने दस प्रत्याशियों के नाम पांच दिन पहले ही तय कर चुकी है। दो दिन पहले उसने उनमें से पांच की सूची जारी भी कर दी थी। एआईसीसी महासचिव और असम प्रभारी  हरीश रावत ने उम्मीद जताई थी कि दूसरी सूची में भी जारी हो जाएगी। हालांकि सीएम मनोहर परिकर के देहावसान के कारण बीजेपी की सूची में संभावित देरी से शायद कांग्रेस भी एक-दो दिन और देखेगी।
एआईसीसी में असम में कोकराझाड़, बरपेटा, धुबड़ी और गुवाहाटी सीटों को लेकर विचार-मंथन का दौर अभी भी चल रहा है इसी तरह से बीजेपी का हाल है। कांग्रेस भी प्रतीक्षा में है। वैसे आपको बता दें कि कांग्रेस के सामने फिलहाल अपनी सीटें बढ़ाने से ज्यादा बीजेपी को जीतने नहीं देने की प्राथमिकता अधिक हो गई है।उसके कई नेता राहुल-सोनिया को यही समझा एआईयूडीएफ के महत्व को रेखांकित कर रहे हैं। वे बता रहे हैं कि कमजोर प्रत्याशी उतारने से धुबड़ी और बरपेटा सीट एआईयूडीएफ प्रत्याशी जीत सकते हैं।