मोबाइल नेटवर्क सेवा में जियो की धमाकेदार एंट्री के बाद से अन्य कंपनियों के लिए अपने ग्राहकों को खुद से जोड़े रखना एक चुनौती बनी हुई है। ऐसे में भारती एयरटेल और बीएसएनएल नोकिया के साथ मिलकर अपने मौजूदा नेटवर्क को 5 जी में बदलने के लिए काम कर रहे हैं।

फिनलैंड की कंपनी ने इसके लिए हाल ही में एयरटेल और बीएसएनएल के साथ मेमोरैंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग(एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। नोकिया के मार्केट हेड(इंडिया) संजय मलिक ने बताया कि इन एमओयू का मकसद यहां 5जी लाना है। उसके लिए किन चीजों की जरूरत है,यह देखा जाएगा। उन ऐप्लिकेशन की पहचान की जाएगी,जो टारगेट ऑडियंस के काम आ सकते हैं। यह 5जी में एंट्री के लिए शुरूआती कामकाज है। अंतरराष्ट्रीय मार्केट में 5जी का कमर्शियल लॉन्च 2019-20 के दौरान हो सकता है।उन्होंने बताया कि भारत में इसके लिए फील्ड,कंटेंट और ऐप्लिकेशन ट्रायल 2018 में शुरू हो जाएगा। नोकिया पहले ही एयरटेल को 9 सर्किल के लिए 4जी उपकरणों की आपूर्ति करती है। इनमें गुजरात,बिहार,यूपी ईस्ट,मुंबई,मध्य प्रदेश,पश्चिम बंगाल,ओडिशा,पंजाब और केरल शामिल हैं। हाल ही में वह बीएसएनएल के फेज 9 के एस्पेंशन के लिए सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी बनकर उभरी है। वह टेलिकॉम कंपनी के लिए भी अडवांस्ड परचेज ऑर्डर पर काम कर रही है। मलिक ने बताया कि बीएसएनएल अभी 5जी की बुनिया तैयार कर रही है। उधर भारत सरकार का इरादा 3 हजार एमएचजेड बैंड में स्पैक्ट्रम ऑक्शन करने का है। नोकिया में इंडिया मार्केट के एंड टु एंड सेल्स सॉल्यूशनिंग हेड अमित मारवाह ने इसे सही दिशा में उठाया गया कदम बताया है।मारवाह ने बताया कि 5जी की तरफ हम तेजी से बढ़ रहे हैं। ये देखना जरूरी है कि भारत में इसके लिए कौन सा स्पेक्ट्रम अवलेबल होगा और उस पर काम करना जरूरी है। अगर आप ओवरऑल ईकोसिस्टम देखें और इस पर नजर डालें कि 5जी टेक्नॉलजी किस तरह से डवलप हो रही है तो यह सिर्फ 3.5 जीएचजेड या 700 एमएचजेड हो सकती है। हालांकि आगे चलकर मिलीमीटर वेव्स और सेंटीमीटर वेव्स और गीगाहटर््ज स्पेक्ट्रम के बारे में भी सोचना है। नोकिया बेंगलूरु में अपने रिसर्च एंड डवलपमेंट सेंटर में एक एस्पीरियंस सेंटर बना रही है,जिसमें 5जी के लिए भारत में स्टेकहोल्डर की जरूरत को समझा जाएगा। मारवाह ने बताया कि 2जी को दुनिया भर में डवलप होने में 10 साल का समय लगा। 3जी में इससे कम और 4जी में तो उससे भी कम वक्त लगा। आज भारत इस सेक्टर में टेक्नॉलजी के मामले में दुनिया के किसी देश से कम नहीं है। हम इस मौके का फायदा उठाना चाहते हैं।