उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) को आईएनआई सीईटी 2021 परीक्षा एक महीने के लिए स्थगित करने का आदेश दिया। यह परीक्षा पहले 16 जून का होने वाली थी। अब यह परीक्षा एक महीने बाद किसी भी दिन करायी जाने वाली थी। 

न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी और न्यायमूर्ति एम आर शाह की खंडपीठ ने 23 एमबीबीएस डॉक्टरों के समूह, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, मेडिकल स्टूडेंट नेटवर्क (छत्तीसगढ़ चैप्टर) और कोविड मरीजों के उपचार में लगे 35 अन्य रेजीडेंट डाक्टरों की याचिकाओं पर सुनवाई करने के बाद यह आदेश दिया। न्यायालय ने कहा, अभ्यर्थियों ने जिन केन्द्रों को चुना है, वे उनसे काफी दूर कोविड ड्यूटी कर रहे हैं। उन्हें तैयारी के पर्याप्त समय नहीं मिला है, इसके मद्देनजर हमारा मानना है कि 16 जून की तारीख परीक्षा के लिए निर्धारित करना मनमानी है। हम एम्स को निर्देश देते हैं कि वह इस परीक्षा को कम से कम एक महीने के स्थगित कर दे। 

याचिकाकर्ताओं ने 16 जून को परीक्षा करवाने को चुनौती देते हुए कहा कि अधिकतर डॉक्टर विभिन्न अस्पतालों में कोविड ड्यूटी कर रहे हैं और उन्हें परीक्षा की तैयारी करने का पर्याप्त समय नहीं मिला है। उन्होंने याचिका में पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स में प्रवेश के लिए होने वाली इस परीक्षा को स्थगित किये जाने की मांग करते हुए इस बारे में निर्देश देने की गुहार लगायी है। याचिकाकर्ताओं के वकील अरविंद दातार ने कहा कि जब मई में होने वाली नीट परीक्षायें अगस्त तक के लिए स्थगित की जा सकती हैं तो आईएनआई सीईटी की परीक्षा क्यों नहीं स्थगित की जा सकती। 

एम्स के वकील दुष्यंत पाराशर ने पीठ से कहा कि मई में प्रॉस्पेक्टस जारी कर दिया था और एक मई को अभ्यर्थी को परीक्षा के बारे में अवगत किया गया था। अगर परीक्षा रोक दी गयी तो डाक्टरों की कमी हो जायेगी। उन्होंने कहा कि देश के 32 राज्यों में परीक्षा की तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं। देश के कई हिस्सों में कोरोना वायरस संक्रमण की स्थिति में भी सुधार हो गया है। न्यायालय ने हालांकि जोर दिया कि परीक्षा कम से कम एक महीने के लिए स्थगित की जानी चाहिए। एम्स के वकील ने निर्देश लेने के लिए सोमवार तक का समय देने की मांग की लेकिन पीठ ने यह कहते हुए इससे इन्कार कर दिया कि परीक्षा की तिथि काफी नजदीक है।