पेट्रोल-डीजल ही नहीं बल्कि खाद्य तेल के दाम ने भी आम आदमी का बजट बिगाड़ दिया है।  पिछले एक साल के दौरान सरसों तेल का भाव करीब दोगुना हो चुका है।  केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि सरसों का तेल थोड़ा महंगा हुआ है क्योंकि उसमें सरकार ने मिलावट को बंद किया है।  हालांकि उन्होंने कहा कि ये भारत सरकार का बहुत महत्वपूर्ण फैसला है और इसका फायदा देशभर के तिलहन और सरसों में काम करने वाले किसानों को होने वाला है। 

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बढ़ते सरसों के तेल को लेकर सफाई दी है।  उन्होंने कहा कि अब तेल में किसी प्रकार की कोई मिलावट नहीं होगी इसलिए दाम बढ़ाए गए हैं।  बीजेपी का मानना है कि इसका फायदा तिलहन और सरसों में काम करने वाले किसानों को होगा। 

कोरोना के इलाज और महंगाई की मार ने पहले ही आम जनता की कमर तोड़ दी थी। खाद्य तेल के तौर पर सबसे ज्‍यादा इस्तेमाल सरसों तेल का ही होता है।  ऐसे में बीते एक साल के दौरान इसके दाम में लगभग दोगुना इजाफा आम आदमी की परेशानियां बढ़ा रहा है।  लेकिन केवल सरसों तेल ही नहीं बल्कि मूंगफली, सूरजमुखी, डालडा और रिफाइंड जैसे दूसरे खाद्य तेलों के दाम में भी इजाफा देखने को मिला है। 

इस साल जिस सरसों तेल का भाव 170 से 180 रुपये प्रति लीटर चल रहा है, वही सरसों तेल पिछले साल मई के दौरान 120-130 रुपये के करीब था।  ऑनलाइन मार्केट में ब्रांडेड कंपनियां कच्‍ची घानी सरसों तेल को 175 से 180 रुपये प्रति लीटर के भाव से बेच रही है। 

इसी प्रकार सोयाबीन रिफाइंड ऑयल फिलहाल 160 रुपये प्रति लीटर के भाव से बिक रहा है।  पिछले साल यह 120 रुपये प्रति लीटर था।  मई 2020 में 132 रुपये प्रति लीटर बिकने वाले सूरजमुखी तेल का भाव अब 200 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच चुका है।  इसी प्रकार वनस्‍पति तेल का दाम पिछले साल 100 रुपये प्रति लीटर था।  अब यह 140 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच चुका है।