असम गण परिषद (एजीपी) ने मंगलवार को नागरिकता संशोधन विधेयक के विरोध में एक विशाल रैली निकाली। इसके साथ ही परिषद ने केंद्र की भाजपानीत सरकार से कहा कि अगर वे ऐतिहासिक असम समझौते और प्रदेश के लोगों की इज्जत करते हैं तो इस विधेयक को कूड़े के डब्बे में उठाकर फेंक दें।

एजीपी अध्यक्ष अतुल बोरा ने असम समझौते पार्टी के लिए 'गीता, बाईबल और कुरान' जैसा बताया और कहा कि इसे स्थानीय लोगों के अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए निश्चिय ही लागू किया जाना चाहिए।

यह रैली शहर के चंदमारी क्षेत्र के लातासिल मैदान से शुरू हुई। यह उस विधेयक के विरोध में निकाली गई जिसके अंतर्गत अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के हिंदु, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई अल्पसंख्यक भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर सकेंगे।

यह विधेयक दोनों सदनों की संयुक्त संसदीय समिति के समक्ष विचाराधीन है। एजीपी असम में भाजपानीत गठबंधन सरकार की सहयोगी है और पार्टी के तीन विधायक मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल के मंत्रिमंडल का हिस्सा हैं।

असम में विधेयक के विरोध में 60 संगठनों ने 12 घंटे का बंद बुलाया, जबकि एजीपी ने प्रदर्शन रैली निकालने का फैसला किया।

एजीपी के नेता और राज्य जल संसाधन मंत्री केशव महांता ने कहा, 'हमने हमारे जमीनी कार्यकर्ताओं और असम के लोगों से चर्चा करने के बाद 2016 चुनाव भाजपा के साथ लडऩे का फैसला किया था। अगर भाजपा सरकार नागरिकता (संशोधन) विधेयक 2016 के साथ आगे बढ़ती है तो हम गठबंधन से बाहर होने के लिए तैयार हैं।'

बंद का पूरे प्रदेश में व्यापक असर पड़ा है। सरकार ने सामान्य स्थिति बनाए रखने के लिए प्रशासन को दिशा-निर्देश जारी किए हैं।