मिजोरम के मुख्यमंत्री जोरमथंगा ने कहा कि 64 साल पुराने नागरिकता कानून को किसी भी तरह से कमजोर नहीं किया जाना चाहिए। विवादित नागरिकता संशोधन विधेयक लोकसभा में आठ जनवरी को पारित हुआ था। इस विधेयक को ले कर मिजोरम समेत पूर्वोत्तर राज्यों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। जोरमथंगा ने यहां संवाददाताओं से कहा कि ये (संशोधन) नहीं होने चाहिए। इसे वैसा ही रहने दें जैसा है। इसे प्रस्तावित ढंग से संशोधित नहीं किया जाना चाहिए। हम यही चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर के सभी राज्य इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं और इस मामले पर मेघालय के मुख्यमंत्री एवं केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारियों के साथ विस्तार से चर्चा की गई है। नागरिकता (संशोधन) विधेयक, 2016 बांग्लादेश, पाकिस्तान एवं अफगानिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न से भाग कर आए हिंदुओं, जैन, इसाईयों, सिखों, बौद्धों एवं पारसियों को वैध दस्तावेज न होने की सूरत में भी भारत में छह साल के निवास के बाद भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान करता है। 

प्रस्तावित संशोधन मौजूदा कानून के तहत नागरिकता पाने के लिए ऐसे लोगों के भारत में 12 साल के निवास की अनिवार्यता को घटाता है। जोरमथंगा राज्य के मुद्दों पर कई केंद्रीय मंत्रियों के साथ चर्चा करने के लिए राष्ट्रीय राजधानी में मौजूद थे।