मध्यप्रदेश में बिजली महंगी करने की पूरी तैयारी हो चुकी है. बिजली दर बढ़ाने में कानूनी रोक से बचने के लिए विद्युत नियामक आयोग ने कोर्ट में केविएट भी दायर कर दी है. हालांकि सरकार ने बिजली उपभोक्ताओं को बड़ीराहत भी दी है. कोरोना काल में एक किलोवॉट तक के संयोजित भार वाले घरेलू बिजली उपभोक्ताओं के देयकों की मूल राशि माफ करने के साथ ही सरकार ने इसके लिए पर्याप्त समय भी दिया है.

प्रदेश में बिजली के दाम बढ़ाने के लिए जनसुनवाई प्रस्तावित है. विद्युत नियामक आयोग द्वारा सन 2022-23 के टैरिफ निर्धारण के लिए आम उपभोक्ताओं से आपत्तियां सुझाव मांगे गए हैं. 21 जनवरी तक आमंत्रित इन शिकायतों, सुझावों आदि पर 8, 10 फरवरी को सुनवाई की जानी है. इस संबंध में आयोग द्वारा कोर्ट में एक केविएट याचिका भी दायर कर दी गई है ताकि किसी कानूनी रोक से बचा जा सके.

दरअसल प्रदेश में बिजली पहले से ही महंगी है. इसलिए दर बढ़ाने का व्यापक विरोध सुनिश्चित है. खासतौर पर किसान महंगी बिजली का विरोध कर रहे हैं. बिजली नियामक आयोग को आशंका है कि बिजली दर बढ़ाने के खिलाफ किसान या किसान संगठन कोर्ट में जा सकते हैं इसलिए केविएट दायर करने का निर्णय लिया गया है.

बिजली दर बढ़ाने की तैयारी में लगी बिजली कंपनियों और सरकार ने हालांकि उपभोक्ताओं को एक बड़ी राहत दी है. सरकार ने 31 अगस्त 2020 तक की मूल बकाया राशि एवं अधिभार की आस्थगित राशि के भुगतान में उपभोक्ताओं को ये राहत देने का फैसला लिया है. अधिकारियों के अनुसार इसमें बिजली बिलों की पेनाल्टी और मूल राशि माफ की गई है. उपभोक्ता मामूली राशि जमा कर इस निर्णय का फायदा उठा सकेंगे. बिजली अधिकारियों ने बताया कि कोरोना के दौरान बिल नहीं भरने वालों को मूल राशि का महज कुछ प्रतिशत बिल का एकमुश्त भुगतान करना होगा. अधिभार की पूरी राशि माफ कर दी गई है.