दार्जिलिंग और कालिम्पोंग में पिछले 24 घंटों में दो बड़े बम विस्फोटों के बाद उत्तरी पश्चिम बंगाल की पहाडिय़ों के सभी पुलिस थानों को हाई अलर्ट पर कर दिया गया है।

कालिम्पोंग के पुलिस अधीक्षक अजीत सिंह यादव ने बताया, 'सभी पुलिस स्टेशनों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। संघर्ष प्रभावित इलाकों में सुरक्षा बलों द्वारा वही रणनीति अपनाई जा रही है जो विद्रोहियों से निपटने के लिए अपनाई जाती हैं।'

उन्होंने कहा, 'पुलिस को नए प्रकार के हथियार दिए गए हैं।' शनिवार रात कालिम्पोंग पुलिस स्टेशन के बाहर एक विस्फोट में नागरिक स्वयंसेवक राकेश रावत की मौत हो गई थी और होमगार्ड का एक व सीमा सशस्त्र बल (एसएसबी) का एक जवान घायल हो गया था।

यह विस्फोट दार्जिलिंग शहर में हुए विस्फोट के 24 घंटे से भी कम समय में हुआ, जिससे कुछ दुकानों को क्षति पहुंची थी और तनाव बढ़ गया था।

पुलिस ने कहा कि दार्जिलिंग में विस्फोट एक इम्प्रोवाइज्ड विस्फोटक उपकरण (आईईडी) से हुआ था और जिसके कारण इसका प्रभाव व्यापक क्षेत्र में महसूस किया गया।

दोनों विस्फोट गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) द्वारा पृथक गोरखालैंड की मांग के साथ किए जा रहे अनिश्चितकालीन बंद के 69वें दिन हुआ।

इस विस्फोट को लेकर जीजेएम के अध्यक्ष बिमल गुरुंग सहित तीन नेताओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।

इन पर भारतीय दंड संहिता 120बी (आपराधिक षड्यंत्र), आईपीसी की 121/121 ए /122 (सरकार के खिलाफ युद्ध छेडऩा और इसकी इच्छा रखना) और धारा 16/17/18/18ए /18 बी यूएपीए (आतंकवाद और आतंकवादी शिविर बनाने) के तहत आरोप लगाए गए हैं।

जीजेएम नेतृत्व ने हालांकि इन आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया यह विस्फोट उन्होंने किया है जो गोरखालैंड नहीं बनने देना चाहते हैं।

गुंरग ने गृह मंत्री राजनाथ सिंह से विस्फोट की जांच के लिए सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में उच्च स्तरीय जांच समिति गठित किए जाने की मांग की है, जिसमें राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) भी शामिल हो।