असम के बाद मणिपुर ने भी एनआरसी को लागू करने पर अपनी सहमति दिखाई है। राज्य कैबिनेट की मीटिंग में इस आशय का एक प्रस्ताव पास किया गया है। दरअसल पूर्वोत्तर के कई राज्य अवैध प्रवासियों से प्रभावित हैं। अवैध प्रवासियों के चलते इन राज्यों के मूल निवासियों के जनाकिकी में भारी फेर बदल हो रहा है। ऐसे में इन राज्यों के मूलनिवासियों मे अवैध प्रवासियों को लेकर भारी आक्रोश फैल रहा है।


बता दें कि केद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने देश में अवैध अप्रवासियों को लेकर गुवाहाटी में कहा था कि वो देश में एक भी अवैध घुसपैठिया को नहीं रहने देंगे। गृहमंत्री ने कहा कि असम से एनआरसी के मुद्दे को तेजी से तय समय में पूरा किया गया है। ज्ञात हो कि अमित शाह ने नॉर्थ ईस्ट काउंसिल के 68वें पूर्णस्त्र को संबोधित करते हुए ये बात कही। नॉर्थ ईस्ट की इस काउंसिल में पूर्वोतर के 8 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी भाग लिया।

वहीं अवैध प्रवासियों की एक बड़ी संख्या से प्रभावित राज्य पश्चिम बंगाल भी है। जहां एनआरसी को लागू कहने की मांग चल रही है। हालांकि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने पिछले दिनों यह स्पष्ट कर दिया है कि राज्य की तृणमूल कांग्रेस सरकार प्रदेश में राष्ट्रीय नागरिक पंजी लागू करने की अनुमति नहीं देगी। ममता ने विधानसभा में बताया कि एनआरसी का कार्यान्वयन कुछ नहीं, बल्कि बीजेपी की केंद्र सरकार का राजनीतिक प्रतिशोध है। असम में एनआरसी की आलोचना करते हुए विधानसभा में एक प्रस्ताव भी पारित किया गया।


माना जा रहा है कि करीब एक करोड़ से ज्यादा अवैध बांग्लादेशी पश्चिम बंगाल की जमीन पर रहते हैं। जिसे लेकर बंगाल की जनता में काफी आक्रोश है। हालिया लोकसभा चुनाव में अवैध घुसपैठियों का मुद्दा हावी रहा है। जिसे लेकरक बीजेपी ने बंगाल की जनता से अवैध प्रवासियों को हटाने का वादा भी किया है।