पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच वाकयुद्ध जारी है। पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार डॉ. मोईद यूसुफ ने कहा कि काबुल रोज-ब-रोज अपने वरिष्ठ अधिकारियों के "मूर्खतापूर्ण बयानों" से शर्मिंदा हो रहा है। इससे द्विपक्षीय संबंध खराब हो रहे हैं। इससे पहले अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने तालिबान को उकसाने के लिए पाकिस्तान को फटकार लगाई थी।

अशरफ गनी ने कहा था कि पिछले महीने 10,000 'जिहादी' लड़ाके पाकिस्तान से अफगानिस्तान में एंट्री किए हैं। जबकि इमरान खान के नेतृत्व वाली पाकिस्तान सरकार तालिबान को चल रही शांति वार्ता में "गंभीरता से बातचीत" करने के लिए मनाने में विफल रही है। इस पर पाकिस्तान के पीएम इमरान खान उखड़ गए और कहा कि अफगानिस्तान में अशांति का सबसे ज्यादा खामियाजा पाकिस्तान को भुगतना पड़ा है।

अब अफगानिस्तान के पहले उप राष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह के तंज पर पाकिस्तान तमतमा गया है। पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार डॉ. मोईद यूसुफ ने गुरुवार को कहा कि इस्लामाबाद अफगान शांति के लिए प्रतिबद्ध है और अफगानिस्तान में कुछ खेल बिगाड़ने वालों का मूर्खतापूर्ण बयान युद्धग्रस्त राष्ट्र की शांति और स्थिरता के लिए उसके समर्थन को प्रभावित नहीं करेगा।

डॉ. मोईद यूसुफ की टिप्पणी अफगानिस्तान के पहले उप राष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह के एक हालिया ट्वीट के संदर्भ में थी, जिन्होंने 1971 की जंग के बाद भारत के सामने पाकिस्तानी सेना के सरेंडर की एक तस्वीर शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा था कि पाकिस्तान तालिबान और आतंकवाद के जरिए अपने इस आघात को नहीं भर पाएगा।

पहले उप राष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह के ट्वीट के जवाब में डॉ. मोईद यूसुफ ने सिलसिलेवार ट्वीट किया कि इन मूर्खतापूर्ण बयानों के कारण अफगानिस्तान को रोजाना शर्मिंदा किया जा रहा है। अफगानों को निश्चिंत होना चाहिए कि हर कोई इन खेल बिगाड़ने वालों के नापाक एजेंडे को देख सकता है। हम शांति और स्थिरता के लिए सभी अफगानों को पाकिस्तान के समर्थन को प्रभावित करने वाले मुट्ठी भर जहरीले दिमागों वालों को इसकी इजाजत नहीं देंगे।

पाकिस्तान के एनएसए ने कहा कि अफगानिस्तान के सीनियर अधिकारी जानबूझकर पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय संबंधों को खराब करना चाहते हैं। अफगानिस्तान के वरिष्ठ अधिकारी अपनी विफलता से ध्यान हटाने के लिए अपने कड़वे और भ्रामक बयानों से पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच द्विपक्षीय संबंधों को बाधित करने की कोशिश कर रहे हैं।

युसूफ ने कहा कि पाकिस्तान अफगान शांति के लिए प्रतिबद्ध है। पाकिस्तान अफगानिस्तान में एक समावेशी राजनीतिक समझौता करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी भावना से प्रधानमंत्री इमरान खान ने हाल ही में राष्ट्रपति गनी से मुलाकात के लिए हामी भरी है।

अफगानिस्तान के पहले उप-राष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह ने 1971 की जंग में भारत के सामने पाकिस्तान के आत्मसमर्पण की तस्वीर शेयर कर पाकिस्तान पर तंज कसा। सालेह ने ट्वीट कर पाकिस्तान पर अफगान शांति प्रक्रिया को बेपटरी करने का आरोप लगाया। अमरुल्ला सालेह ने ट्वीट किया कि हमारे इतिहास में ऐसी कोई तस्वीर नहीं है और न ही कभी होगी। हां, कल मैं एक बार को हिल गया था क्योंकि एक रॉकेट मेरे ऊपर से उड़कर गया और कुछ मीटर की दूरी पर गिर गया। लेकिन पाकिस्तान के प्रिय ट्विटर हमलावरों, तालिबान और आतंकवाद इस तस्वीर के आघात को ठीक नहीं कर सकते। कोई अन्य तरीका खोजें। सालेह के ट्वीट पर काफी प्रतिक्रिया देखने को मिली।

सालेह ने जो तस्वीर शेयर की वह 1971 की है जिसे पाकिस्तान सेना के भारत के सामने आत्मसमर्पण करते वक्त खींचा गया था। 1971 के युद्ध में भारत ने पाकिस्तान को हराया था और पूर्वी पाकिस्तान को आजाद कराया था। इसी दिन एक नया देश बांग्लादेश बनकर नक्शा पर सामने आया था। इस जंग में पाकिस्तान के जनरल अमीर अब्दुल्ला खां नियाजी को 90 हजार के करीब सैनिकों के साथ सरेंडर करना पड़ा था। इसके बाद पूर्व पाकिस्तान का हिस्सा आजाद हुआ और बांग्लादेश बना।

बहरहाल, सालेह इससे पहले भी पाकिस्तान पर तालिबान की मदद करने का आरोप लगा चुके हैं। उन्होंने हाल ही में पाकिस्तान वायु सेना पर तालिबान को एक महत्वपूर्ण सीमा चौकी पर कब्जा करने के बाद मदद मुहैया कराने का आरोप लगाया था।

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच संबंध खराब हो गए हैं और इस्लामाबाद में अफगान राजदूत की बेटी के कथित अपहरण ने संबंधों को और नुकसान पहुंचाया है। पिछले हफ्ते की घटना के बाद दोनों देशों ने अपने राजदूतों को वापस बुला लिया है।