अफगानिस्तान (Afghanistan) पर कब्जा करने के बाद तालिबान के सामने एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। संभव है कि जल्द ही अफगानिस्तान में पॉवरकट (power cut in Afghanistan) कर दिया जाए। यह देश अंधेरे में डूब जाए। दरअसल, अफगानिस्तान में बिजली आपूर्ति करने वाली कंपनियों का बकाया भुगतान करने में तालिबान (taliban) नाकाम हो रहा है। खबरों के मुताबिक अफगानिस्तान विद्युत आपूर्ति (Electricity Bills Of Companies) के लिहाज से पूरी तरह से पड़ोसी देशों से आयात पर निर्भर है। यहां बिजली प्रमुखतया उज्बेकिस्तान, ताजिकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों से आयात की जाती है। आधी बिजली तुर्कमेनिस्तान से आती है। अगर उनका बकाया भुगतान जल्द ही नहीं हुआ तो आपूर्ति रोकी जा सकती है। ऐसा होता है तो तालिबान अंधेरे में डूब जाएगा।

अफगानिस्तान (afganistan) पर तालिबान (taliban) के कब्जे के दो हफ्ते बाद इस्तीफा देने वाल नूरजाई प्राधिकरण के अधिकारियों के संपर्क में बने हुए हैं। उन्होंने बताया कि घरेलू बिजली उत्पादन देश में सूखे की वजह से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इसके अलावा अफगानिस्तान में राष्ट्रीय ग्रिड (National Grid afganistan) जैसी कोई व्यवस्था भी नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि चूंकि तालिबान अब सत्ता में है, इसलिए वह ट्रांसमिशन लाइनों पर हमला नहीं कर रहा है, जिसके चलते अफगानिस्तान को पर्याप्त बिजली मिल रही है, लेकिन जल्द ही भुगतान नहीं हुआ तो आपूर्ति रोकी जा सकती है।

इस तरह के हालात पर संयुक्त राष्ट्र लगातार चिंता जताता आ रहा है, वहीं रविवार को यूरोपीय संघ के विदेश नीति प्रमुख जोसप बोरेल ने कहा कि अफगानिस्तान पर गंभीर मानवीय, आर्थिक व सामाजिक संकट का खतरा बना हुआ है, जो क्षेत्रीय व वैश्विक मुसीबतें बढ़ाने वाला है, क्योंकि अफगानिस्तान दुनिया के सबसे गरीब देशों में से एक है, जहां एक तिहाई आबादी दो डॉलर प्रतिदिन से भी कम की आय में गुजर-बसर कर रही है।