अफगानिस्तान में तालिबान के जुल्मों के खिलाफ अब महिलाओं ने बगावत शुरु कर दी है। दरअसल तालिबान ने स्कूली छात्राओं के लिए नए ड्रेस कोड को लागू किया, जो कि पसंद नहीं आया। अब अफगान महिलाएं स्कूली छात्राओं के लिए तालिबानी परिधान की निंदा कर रही हैं और इसमें उनका सबसे बड़ा हथियार बना है इंटरनेट। ये महिलाएं कलरफुल ट्रेडिशनल वियर की तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर कर रही हैं और #DoNotTouchMyClothes, #AfghanistanCulture जैसे हैशटैग इस्तेमाल कर रही हैं।

इस कैंपेन की शुरुआत अफगानिस्तान में अमेरिकन यूनिवर्सिटी की पूर्व प्रोफेसर बहार जलाली ने की है। अब उनके समर्थन में सैकड़ों अफगान महिलाएं इससे जुड़ रही हैं और तालिबान कानूनों का विरोध करते हुए अपनी तस्वीरें और पोस्ट सोशल मीडिया पर शेयर कर रही हैं। तालिबान के नए उच्च शिक्षा मंत्री ने रविवार को घोषणा की थी कि महिलाओं को अफगानिस्तान में विश्वविद्यालयों में जाने की अनुमति दी जाएगी, लेकिन इसके लिए उन्हें पुरुषों से अलग-थलग रहने के नियमों और इस्लामी ड्रेस कोड का पालन करना होगा।

काबुल की एक सरकारी यूनिवर्सिटी में महिला छात्रों ने शनिवार को काले कपड़े पहनकर तालिबानी झंडे लहराते हुए फोटो खिंचवाई। जलाली के अनुसार उनके अभियान का उद्देश्य तालिबान की ओर से फैलाई जा रही गलत सूचनाओं के खिलाफ सही जानकारी देना और शिक्षा देना है। जलाली ने कहा कि अफगानिस्तान में आज तक किसी भी महिला ने कभी इस तरह के कपड़े नहीं पहने हैं। यह पूरी तरह से विदेशी और अफगान संस्कृति के लिए विदेशी है।