अफगानिस्तान की तालिबान सरकार में जबरदस्त फूट पड़ गई है। इसके चलते उन पर काबुल में राष्ट्रपति भवन में लात-घूंसे बरसाए गए हैं। खबर है कि तालिबान की सरकार में हक्कानी गुट का वर्चस्व बढ़ गया है जिसके चलते उसी के एक कमांडर ने बरादर पर लात घूंसे बरसा दिए।

इससे पहले पिछले हफ्ते बरादर की मौत तक की खबर आयी थी लेकिन बाद में बरादर ने वीडियो जारी करके उन खबरों का खंडन कर दिया था। लेकिन अब अमेरिकन मीडिया में ये खबर सुर्खियों में है कि काबुल में राष्ट्रपति भवन में बरादर के साथ मारपीट भी हुई और गोलियां भी चलीं।

गौरतलब है कि मुल्ला अब्दुल गनी बरादर तालिबान का प्रमुख चेहरा रहा है। वो अमेरिका के साथ बातचीत में भी लगातार शामिल रहा था। अफगानिस्तान छोड़कर गए अमेरिका और उसके सहयोगियों का मानना था कि मुल्ला अब्दुल गनी बरादर अफगानिस्तान में तालिबान सरकार की आवाज होगा। ये भी माना जा रहा था कि तालिबानी कैबिनेट में गैर-तालिबान नेता और जातीय अल्पसंख्यकों को भी हिस्सा देगा। एक रिपोर्ट के अनुसार बरादर को तालिबान में ‘सॉफ्ट स्टैंड’ वाला नेता माना जाता है और अमेरिका और कई देशों को उम्मीद थी कि देश की कमान बरादर के हाथ में ही सौंपी जाएगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

लेकिन जब तालिबान की अंतरिम सरकार की लिस्ट आई तो बरादर को डिप्टी पीएम का पद ही मिला। इसके ये तर्क दिया गया कि मुल्ला बरादर अमेरिका के दबाव में आ सकता है और आने वाले समय में यह तालिबान की सरकार के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। ऐसा कहने वाले मुख्य रूप से पाकिस्तान समर्थित हक्कानी गुट के नेता थे जिन्हें अंतरिम सरकार में गृह मंत्रालय समेत चार अहम मंत्रालय मिले हैं। सिराजुद्दीन हक्कानी, जो आतंकवाद के लिए एफबीआई की मोस्ट वांटेड सूची में हैं, को कार्यवाहक गृह मंत्री बनाया गया।

अब साफतौर पर माना जा रहा है कि पाकिस्तान समर्थित हक्कानी गुट अफगानिस्तान सरकार में बेहद मजबूत हो चुका है। समावेशी सरकार की बात बिल्कुल पीछे रह गई। आतंकी हक्कानी गुट की मजबूत होती मौजूदगी तालिबान के लिए भी मुश्किलें बढ़ा सकती है और भारत जैसे पड़ोसी देश के लिए भी।