चीन बॉर्डर से लगे इलाके में डिफेंस इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने की मुहिम के तहत अब अरुणाचल प्रदेश का आठवां अडवांस लैंडिंग ग्राउंड (एएलडी) भी जल्द ऑपरेशनल हो जाएगा। सूत्रों के मुताबिक इसके रिपेयर का काम पूरा हो गया है और जून के दूसरे हफ्ते में इसे शुरू करने की तैयारी है। यह अडवांस लैंडिंग ग्राउंड सामरिक दृष्टि से भी बेहद अहम है क्योंकि यह चीन-म्यांमार और भारत के ट्राइजंक्शन पर है। 

ईस्टर्न बॉर्डर पर डिफेंस इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने के लिए रक्षा मंत्रालय ने 2009 में तय किया कि बेकार पड़े एडवांस लैंडिंग ग्राउंड को अपग्रेड किया जाएगा। एयरफोर्स की ऑपरेशनल कैपिबिलिटी बढ़ाने के लिए भी यह बेहद जरूरी कदम था। अरुणाचल प्रदेश में 8 अडवांस लैंडिग ग्राउंड 1962 के युद्ध के बाद से बेकार पड़े थे। ज्यादातर अडवांस लैंडिंग ग्राउंड या तो युद्ध के दौरान नष्ट हुए थे या फिर तब से ही बंद पड़े थे। 2013 में इनकी रीस्ट्रक्चरिंग का काम शुरू किया। ताकि इनमें हेलिकॉप्टर के अलावा एएन-32 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट के साथ ही सुखोई -30 फाइटर एयरक्राफ्ट और एयरफोर्स में शामिल नए फाइटर एयरक्राफ्ट भी उतर सके और उड़ान भर सके, जिसके बाद सात एएलडी तैयार हो गए, लेकिन आठवां एलएलजी जो विजयनगर में हैं वह 2016 में बंद हो गया था और फिर इसे रिपेयर कर फिक्स्ड विंग्स यानी ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट के ऑपरेट करने के लिए तैयार करने का काम शुरू हुआ। 

विजयनगर अरुणाचल प्रदेश के चांगलांग जिले में आता है जो सामरिक दृष्टि से काफी अहम है। सीमा को लेकर चीन यहां कई बार विवाद खड़ा कर चुका है। इसलिए एयरफोर्स की ताकत यहां बढ़ाने की बेहद जरूरत महसूस हुई। आम लोगों को राहत देने के लिए भी यह अडवांस लैंडिंग ग्राउंड जरूरी है। यह अरुणाचल प्रदेश का रिमोट एरिया है जहां तक कोई सड़क भी नहीं जाती। इसलिए यहां रिपेयर के काम के लिए सामान से लेकर काम करने वालों तक को एयरलिफ्ट कर लाया गया। यहां 11 गांव के लोगों ने भी श्रमदान किया ताकि यह अडवांस लैंडिंग ग्राउंड जल्दी तैयार हो जाए और उन्हें भी राहत मिले। सूत्रों के मुताबिक अब यह तैयार है।