गोजमुमो अध्यक्ष विनय तमांग के असम दौरे का ऑल असम स्टूडेंट यूनियन ने असम दौरे का भारी विरोध किया। बताया जाता है कि विनय के साथ गए प्रतिनिधिमंडल में शामिल एक नेता ने आसू के नेताओं से यह कह डाला कि एनआरसी के सिलसिले में जमीनी हकीकत जानने के लिए वे लोग असम में आए हैं।


जिस पर आसू ने कड़ा प्रतिवाद करते हुए कहाकि आपको यह सलाह देने की कोई आवश्यकता नहीं है, न तो इस राज्य में कोई आपकी की पार्टी का विधायक है और नहीं विधायक, इसके बाद भी आप सलाह देने यहां चले आए। विनय असम पुलिस के प्रति आभार व्यक्त किया। वहीं दूसरी ओर इस बात की जानकारी पहाड़ पर होते ही एनआरसी को लेकर एक बार फिर से बहस शुरू हो गई।


भाजपा विधायक नीरज जिम्बा ने कहाकि एक भी गोरखा भारतीय नागरिकता से वंचित नहीं हो पाएगा। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एनआरसी को लेकर राजनीति कर रही हैं, उनका विरोध आधारहीन है, किसी भी गोरखा के लिए एनआरसी खतरा नहीं है। राजनीति करने से अच्छ है कि विनय पहाड़ के गोरखाओं का कागज बनवाने में मदद करें, असम की जगह पहाड़ की समस्या पर ध्यान केंद्रित करें।


विमल गुट के रोशन गिरी ने कहाकि एनआरसी की आड़ में बांग्लाभाषी आमरा बंगाली और दूसरे देश से आने वाले घुसपैठियों को मुख्यमंत्री सुरक्षा कवच प्रदान करने का काम कर रही है। सच्चाई यह है कि 70प्रतिशत गोरखा चाय बागान वासी है, उनके पास जमीन का कागज नहीं है, मतदाता सूची में नाम दर्ज होने को लेकर ही वह सुरक्षा महसूस करता है।


नागरिकता का प्रमाण देना कठिन कार्य है। विनय तमांग को पहाड़ियों पर बांग्ला भाषा थोपे जाने के बारे में अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्हें अपने दौरे की रिपोर्ट जनता में जारी करना चाहिए, ताकि लोगों को यह पता चल सके कि दौरा कितना सफल रहा या फिर विफल। इतना ही नहीं भारतीय गोरखा परिसंघ भी ग्राउंड की हकीकत जानने के लिए असम प्रस्थान कर चुका है।