साल 1971 से अब तक दिल्ली व दिसपुर की सत्ता में रही सभी सरकारों पर आसू ने विदेशी घुसपैठ समस्या के मामले में असम के साथ विश्वासघात करने का गंभीर आरोप लगाया है। आसू अध्यक्ष दीपांक कुमार नाथ की यह प्रतिक्रिया बांग्लादेश के राज्यिक विदेश मंत्री मोहम्मद शाहरियार आलम के बयान के बाद आई है। 

दो दिन पहले दिए गए अपने बयान में आलम ने कहा था कि भारत सरकार ने असम में रह रहे बांग्लादेशी घुसपैठियों के मसले की अभी तक बांग्लादेश सरकार को जानकारी नहीं दी है नाथ ने कहा कि असम आंदोलन के बाद 1985 में समझौता होने के बाद असम घुसपैठ समस्या को गंभीर समस्या करार दिया गया था। इसके बाद दिल्ली व दिसपुर की सरकाों ने किस तरह असमवासियों के साथ विश्वासघात किया, यह बात आलम ने बयान में स्पष्ट कर दी है। 

उन्होंने कहा कि असम समझौते के आधार पर विदेशी समस्या का समाधान नहीं हो जाता, तब तक आसू चुप नहीं बैठेगा। आसू महासचिव लुरिनज्योति गोगोई ने कहा कि असम आंदोलन के समय से ही बांग्लादेश की सरकार असम में अवैध नागरिकों की मौजूदगी की बात को नकारती रहती है, जबकि केंद्र व राज्य सरकार आंकड़ों के आधार पर यह बात स्वीकारते रहे हैं। सिर्फ यही नहीं उच्चतम न्यायालय और गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने भी अपने फैसलों में इस बात को रेखांकित किया है। ऐसे में बांग्लादेश सरकार को इस समस्या के बारे में समझाने व बताते की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है।