असम समझौते के 34 साल पूरे होने पर अखिल असम छात्र संघ ने असम आंदोलन में शहीद हुए सभी वीरों को श्रद्धांजलि देने के साथ ही आंदोलन-पीड़ित व्यक्ति तथा राज्यवासियों के प्रति श्रद्धा ज्ञापित किया है। आसू ने इस बात पर नराजगी प्रकट की है कि असम समझौते के बाद दिल्ली-दिसपुर की सत्ता पर सभी दलों की सरकारें रहीं, लेकिन किसी भी सरकार ने असम समझौते को लागू कर विदेशी नागरिक जैसी असम की ज्वलंत समस्या के सामाधन की दिशा में कुछ भी नहीं किया।


अासू ने कहा कि अब और इंतजार नहीं किया जा सकता। सरकार निर्धारित कार्यक्रम के साथ असम समझौते की सभी धाराओं के कार्यन्वयन की घोषणा करे ताकि असम आंदोलन के शहीदों का त्याग बेकार न जाए। आसू अध्यक्ष दीपांक कुमार नाथ और महासचिव लुरिनज्योति गोगोई ने कहा कि असम की विदेश नागरिक समस्या के स्थाई समाधान के सभी उपाय असम समझौैते में ही निहित हैं।


उन्होंने कहा कि पिछले 34 सालों में समझौतें के अनुसार न तो विदेशी नागरिक की पहचान हुई और न ही बहिष्कार, मतदाता सूची में से भी विदेशियों के नाम नहीं हटाए गए। भारत-बांग्लादेश की अंतर्राष्ट्रीय सीमा आज भी सपाट है, जिससे विदेशियों का बेरोकटोक आना-जाना जारी है। 34 सालों में मूल निवासियों के संवैधानिक रक्षा कवच की व्यवस्था नहीं हो पाई।