आम आदमी पार्टी (आप) ने दिल्ली के तीनों नगर निगमों के चुनाव स्थगित किए जाने के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। दिल्ली की सत्ताधारी ‘आप’ ने चुनाव स्थगित करने के राज्य चुनाव आयोग के इस फैसले को ‘मनमाना’ करार देते शीर्ष अदालत ने हुए एक जनहित याचिका दायर की है। 

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याचिकाकर्ता ने दिल्ली में मई 2022 में स्थानीय निकायों का कार्यकाल समाप्त होने से पहले स्वतंत्र एवं निष्पक्ष तरीके से पार्षदों के चुनाव कराने का निर्देश देने की गुहार लगाई है। याचिका में कहा गया है कि नौ मार्च को राज्य चुनाव आयोग ने अप्रैल में चुनाव कराने के लिए एक प्रेस नोट जारी किया था, लेकिन उसके आधे घंटे बाद एक और प्रेस नोट जारी किया गया, जिसमें कहा गया था कि उसे (राज्य चुनाव आयोग को) राज्यपाल से ‘दिल्ली के तीन नगर निगमों के एकीकरण के लिए एक कानून लाने की भारत सरकार की मंशा के बारे में जानकारी प्राप्त हुई है। 

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याचिका में आरोप लगाए गए हैं कि चुनाव आयोग ने केंद्र सरकार के दबाव में चुनाव स्थगित कर दिया। याचिका में पूछा गया है कि क्या राज्य चुनाव आयोग केंद्र सरकार द्वारा नगर निगमों के चुनावों को स्थगित करने के लिए भेजे गए एक अनौपचारिक सूचना से प्रभावित हो सकता है? याचिका में कहा गया, जैसा कि राज्य से निगमों के विलय के संबंध में कोई औपचारिक अधिसूचना, एजेंडा या पत्र नहीं आया है, यह स्पष्ट रूप से अनुच्छेद 243यू के अनुसार संवैधानिक रूप से अनिवार्य पांच साल की अवधि से परे चुनावों के स्वतंत्र और निष्पक्ष संचालन में बाधा डालने की रणनीति को दर्शाता है। दिल्ली के बाद पंजाब में सत्ता में आई ‘आप’ ने चुनाव स्थगित करने के इस कदम को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के चुनाव आयोग को प्रभावित करने का ‘बेशर्म’ प्रयास करार दिया।