आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक इमरान हुसैन को दिल्ली हाई कोर्ट ने ऑक्सिजन सिलिंडर की जमाखोरी के आरोप से बरी कर दिया है। इससे पहले हाई कोर्ट ने 10 मई की सुनवाई के दौरान कहा था कि अगर कोई अपने संसाधनों से कुछ जुटाए और उसका आम लोगों में वितरण करे। दिल्‍ली हाईकोर्ट ने 8 मई को दिल्ली सरकार के कैबिनेट मंत्री इमरान हुसैन को ऑक्सिजन सिलेंडर की जमाखोरी के आरोप में नोटिस भेजा था। कोर्ट ने उन्हें 10 मई को तलब किया था। तब हुसैन ने अदालत में दावा किया था कि उन्होंने 10 ऑक्सिजन सिलेंडर दिल्ली से किराए पर लिए और फरीदाबाद से रीफिल कराकर अपने विधानसभा क्षेत्र की जनता में बांटी। हाई कोर्ट ने विधायक को संबंधित दस्तावेज जमा कराने का आदेश दिया था। अब रिहाई के आदेश पर मंत्री इमरान हुसैन ने खुशी जताई है।

दरअसल, एडवोकेट अमित तिवारी ने दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दाखिलकर नेताओं पर ऑक्सिजन की जमाखोरी करने का आरोप लगाया गया था। उन्‍होंने फेसबुक पोस्‍ट का हवाला देते हुए फोटो के जरिये यह साबित करने की कोशिश की कि हुसैन ने अपने निर्वाचन क्षेत्र में कथित तौर पर ऑक्सिजन सिलेंडर बांटे। याचिका पर जस्टिस विपिन सांघवी और रेखा पल्‍ली ने दिल्‍ली सरकार को भी नोटिस जारी किया। जवाब में सरकार के सीनियर एडवोकेट राहुल मेहरा ने कोर्ट को आश्‍वस्‍त किया कि अगर मंत्री या इसमें शामिल किसी अन्‍य व्‍यक्ति के बारे में इस तरह के कोई आरोप सही पाए गए तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

तब दिल्ली सरकार ने मामले की सुनवाई 17 मई तक के लिए स्थगित करने की अपील की थी ताकि और नेता भी इस मुद्दे पर अपना हलफनाम दायर कर सकें। दिल्ली में ऑक्सिजन सिलेंडर और रेमेडिसिवर जैसी दवाइयां बांटे जाने की कई खबरें आ रही थीं। इस पर कोर्ट ने कहा कि जमाखोरी उसे कहते हैं जब कोई कम पड़ रहे सामानों को गोदाम में रख कर बैठ जाए और बाजार में ज्यादा कीमतों में बेचे। दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान पूर्वी दिल्ली से बीजेपी सांसद गौतम गंभीर का जिक्र आया था। दिल्ली हाई कोर्ट ने सवाल किया था कि क्या गौतम गंभीर कोविड -19 के इलाज के लिए इस्तेमाल की जा रही दवाओं को वितरित करने और उन्हें बड़ी मात्रा में खरीदने में सक्षम हैं?