मिजोरम में 10 वर्षों के कांग्रेस शासन को समाप्त करते हुए मिजो नेशनल फ्रंट(एमएनएफ) के प्रमुख जोरमथांगा ने शनिवार को तीसरी बार इस पूर्वोत्तर राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली।

राज्यपाल कुम्मानाम राजशेखरन ने यहां राजभवन में एक समारोह में जोरमथांगा और मंत्रिपरिषद के 11 सदस्यों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।

जोरमथांगा (74) इससे पहले दो बार 1998-2003 और 2003-2008 के दौरान राज्य के मुख्यमंत्री रहे थे।

समारोह में पूर्व मुख्यमंत्री ललथनहावला, मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड के.संगमा, असम गण परिषद(एजीपी) नेता और असम के पूर्व मुख्यमंत्री प्रफुल्ल कुमार महंत, कई राजनीतिक पार्टियों के नेता और कई वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी मौजूद थे।

मंत्रि परिषद के रूप में शपथ लेने वाले सदस्य तानलुइया, आर. लालथंगलियाना, लालचमलियाना, आर. लालजिरलियाना, सी लालरिनसांगा(सभी कैबिनेट मंत्री), के लालरिनलियाना, लालछनदामा राल्ते, लालरुआतकिमा, के बेछुआ, टी.जे. ललनुनटलुआंगा और राबर्ट रोमाविया राल्ते(सभी राज्य मंत्री) हैं।

वर्ष 1987 के बाद विधानसभा के लिए पांचवी बार चुने जाने वाले तानलुइया को उपमुख्यमंत्री नियुक्त किया गया है। मुख्यमंत्री सचिवालय के एक अधिकारी ने मीडिया से कहा, 'मुख्यमंत्री कैबिनेट बैठक के बाद जल्द ही विभागों का बंटवारा करेंगे।'

एमएनएफ ने 28 नवंबर को हुए विधानसभा चुनाव में 26 सीट हासिल की थीं, जो कि इस 40 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत से पांच सीट ज्यादा है।

एमएनएफ ने 2013 विधानसभा चुनाव में केवल पांच सीट हासिल की थी, जबकि कांग्रेस को यहां 34 सीटें मिली थी। इस बार कांग्रेस को केवल पांच सीटें मिली हैं।

भाजपा ने यहां तुइचवांग से एकमात्र सीट जीतकर पहली बार मिजोरम विधानसभा में प्रवेश किया है।

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री ललथनहावला को यहां चंपई दक्षिण और सेरछिप विधानसभा सीटों से हार का सामना करना पड़ा। वहीं जोरमथांगा ने आइजोल पूर्व-1 से पांचवीं बार चुनाव जीता है।

एमएनएफ भाजपा नीत नार्थ इस्ट डेमोक्रेटिक एलायंस(एनईडीए) की घटक दल है। भाजपा और एमएनएफ ने हालांकि क्रमश: 40 और 39 सीटों पर अपने अलग-अलग उम्मीदवार उतारे थे।