11 फरवरी को दक्षिण पूर्व एशिया की ओर बांग्लादेश के कॉक्स बाजार के समुद्र तटीय शहर से कम से कम 90 रोहिंग्या शरणार्थियों को लेकर नाव ने अपनी यात्रा शुरू की थी। जानकारी मिली है कि जब से भारत के अंडमान की ओर रुख कर रहे थे तब छह दिन पहले नाव का इंजन टूट गया था। थाईलैंड स्थित अराकान प्रोजेक्ट ’के निदेशक क्रिस लेवा ने बताया कि 90 में से आठ शरणार्थी पहले ही मर चुके हैं।



क्रिस लेवा ने बताया कि उनके पास पीने का पानी या भोजन नहीं बचा है, इसलिए वे हताशा होकर समुद्र का पानी पी रहे हैं। यही कारण है कि उनमें से कुछ रोहिंग्यों की मौत हो गई। सभी पीड़ित समुद्री पानी का सेवन करने के बाद तीव्र दस्त से पीड़ित हो गए। भारतीय नौसेना के सूत्रों ने बताया कि अंडमान में केवल भारतीय नौसेना, तट रक्षक ही उन्हें बचा सकते हैं।


भारतीय नौसैनिक एक नाव की पहचान का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं जो अंडमान से भारतीय पानी में बह गए है। शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र के उच्चायुक्त (UNHCR) ने इस नाव पर रोहिंग्या शरणार्थियों के तत्काल बचाव की अपील की है। UNHCR ने कहा कि उसे "रोहिंग्या शरणार्थियों की अपुष्ट संख्या 20 फरवरी को एक जहाज में संकटग्रस्त जहाज पर अपुष्ट संख्या" की रिपोर्ट मिली। UNHCR ने भारत, बांग्लादेश और म्यांमार से तुरंत नाव का पता लगाने के लिए एक तलाशी अभियान शुरू करने का आग्रह किया।