स्वदेशी सैन्य विमानन क्षेत्र की सबसे बड़ी डील को अंतिम रूप दे दिया गया है, जिसमें हिन्‍दुस्‍तान एरोनॉटिक्‍स लिमिटेड भारतीय वायुसेना के लिए 83 सिंग्ल ईंजन वाले तेजस फाइटर प्लेन तैयार करेगी। इस डील की खास बात यह है कि पहले यह 56,500 करोड़ रुपए की थी, लेकिन अब एचएएल 39,000 करोड़ रु में ही 83 तेजस उपलब्ध कराएगी। करीब एक साल तक बातचीत के बाद इस डील की कुल लागत में 17,000 करोड़ रुपए की कमी आई है।


बताया जाता है कि शुरुआत में एचएएल ने तेजस मार्क-1 ए जेट तैयार करने और उसके रख-रखाव के लिए जितनी मोटी रकम की मांग की थी उससे भारतीय वायुसेना और रक्षा मंत्रालय अचंभित थी। आखिरकार बातचीत के बाद यह डील 39,000 करोड़ रुपए में फाइनल हो चुकी है। इस डील को लेकर अंतिम मंजूरी के लिए फाइल कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी को भेजा जा रहा है। माना जा रहा है कि 31 मार्च को समाप्त हो रहे इस वित्तीय वर्ष से पहले इसे मंजूरी दे दी जाएगी। सूत्रों का कहना है डील होने के बाद एचएएल ने तीन साल में फाइटर जेट की डिलीवरी शुरू करने का वादा किया है।


रक्षा अधिग्रहण परिषद ने पहली बार नवंबर 2016 में 83 तेजस तैयार करने के लिए एचएएल को 49,797 करोड़ की डील करने की मंजूरी दी थी, लेकिन तेजस ने इस डील के लिए 56,500 करोड़ रुपए की डिमांड कर दी थी। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच मोल-भाव के लिए लंबी बातचीत चली। बातचीत के दौरान वायुसेना ने भी अपनी कुछ जरूरतों में कटौती की, जिसके बाद यह डील फाइनल होती दिख रही है। पाकिस्तान और चीन के खिलाफ रक्षा मोर्चे पर मजबूती के लिए कम से कम 30 स्क्वाड्रन (प्रत्येक स्क्वाड्रन में 18 जेट) की जरूरत है। इसी बात को ध्यान में रखकर वायुसेना लगातार हल्के फाइटर जेट की डील कर रहा है।


मालूम हो कि इस साल मई में पहली बार चार रॉफेल विमानों को अंबाला एयरबेस पर तैनात किया जाना है। फ्रांस के साथ हुए 59,000 करोड़ रुपए की हुई डील के मुताबिक अप्रैल 2022 तक 32 रॉफेल भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल होने हैं। वहीं वायुसेना के लिए चिंता का विषय है कि एचएएल तेजस की सप्लाई में ज्यादा वक्त ले रहा है। अब तक भारतीय वायुसेना के बेड़े में केवल 16 तेजस मार्क -1 मौजूद हैं। 8,802 करोड़ रुपए के दो डील के तहत दिसंबर 2016 में इसकी आपूर्ति हुई थी।


सूत्रों का कहना है कि तेजस मार्क 1ए की टेस्टिंग 2022 तक पूरी होने की संभावना है। इसके बाद वायुसेना 123 पावरफुल ईंजन से लैस 170 तेजस मार्क-2 को बेड़े में जोडऩे की कोशिश में है। हालांकि तेजस मार्क-2 और उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान (एएमसीए) कहे जाने वाले स्वदेशी स्टील्थ के 5वें वर्जन के लड़ाकू विमानों को मिलने में कुछ और साल लगने की संभावना है।