मध्यप्रदेश में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान रेमडेसिविर इंजेक्शन की कमी की खबरों के बीच इनकी कालाबाजारी के मामले में लगभग 80 आरोपी गिरफ्तार कर जेल भेजे जा चुके हैं। इन आरोपियों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) और चोरबाजारी निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है। 

राज्य के गृह विभाग की ओर से आज बताया गया कि इंजेक्शन की कालाबाजारी के संबंध में इंदौर जिले के 09, उज्जैन के 09, ग्वालियर के 04, जबलपुर के 04, शहडोल के 04, भोपाल के 02, धार के 02 और मंदसौर, ङ्क्षछदवाड़ा तथा रतलाम के 01-01, इस तरह कुल 37 आरोपियों के खिलाफ गृह विभाग ने रासुका की कार्रवाई को अनुमोदित कर दिया है। रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी के मामले में रासुका में इंदौर जिले में 30 और भोपाल जिले में 08 आदेश संबंधित कलेक्टरों ने जारी किए हैं। 

इस तरह ये 38 आरोपी भी गिरफ्तार कर जेल भेजे जा चुके हैं। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार माना जा रहा है कि एक दो दिन में ये 38 मामले गृह विभाग से अनुमोदन के लिए उसके समक्ष आ जाएंगे। इसके अलावा चोरबाजारी निवारण और अत्यावश्यक वस्तु प्रदाय अधिनियम के तहत रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी के संबंध में जबलपुर में 02, उज्जैन में 02 और सागर में 01 तथा ऑक्सीजन की कालाबाजारी के मामले में सतना में 01 आदेश जारी किया गया है। 

इस तरह कुल छह आरोपी गिरफ्तार कर जेल भेजे गए हैं। सूत्रों ने कहा कि रासुका के तहत 12 माह के लिए और चोरबाजारी निवारण अधिनियम के तहत छह महीने के लिए आरोपी को प्रतिबंधात्मक रूप से गिरफ्तार कर जेल में रखे जाने के प्रावधान हैं। राज्य के गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ राजेश राजौरा का कहना है कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर गृह विभाग की ओर से रेमडेसिविर, ऑक्सीजन और अन्य आवश्यक दवाओं की कालाबाजारी करने वालों पर रासुका के तहत सख्त और त्वरित कार्रवाई के निर्देश सभी जिलों के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षकों को दिए गए हैं।