त्रिपुरा विधानसभा की 59 सीटों के लिए हुए चुनावों में 78.56 प्रतिशत वोट पड़े।  जो पिछले चुनाव की तुलना में 14 प्रतिशत कम हैं। पिछली बार त्रिपुरा में 91.82 प्रतिशत मतदान हुआ था।

त्रिपुरा में अब तक कुल 9 बार विधानसभा चुनाव हुए हैं। त्रिपुरा में पहली बार विधानसभा चुनाव 1967 में हुए थे। तब विधानसभा की कुल 30 सीटें थी। उस वक्त 74.32 फीसदी मतदान हुआ था।

इसके बाद अगले विधानसभा चुनाव 1972 में हुए। उस दौरान 60 सीटों के लिए मतदान हुआ था। कुल वोट पड़े थे 67.36 फीसदी। अगला विधानसभा चुनाव 1977 में हुआ। उस वक्त कुल 79.51 फीसदी वोटिंग हुई थी।


1983 के विधानसभा चुनाव में 83.03, 1988 में 85.75, 1993 में 81.18, 1998 में 80.84, 2003 में 78.71 और 2008 में 91.22 फीसदी मतदान हुआ था। अगर वोटिंग ट्रेंड को देखें तो त्रिपुरा में 1972 में कम मतदान हुआ, लेकिन इसके बाद 1988 तक लगातार मतदान प्रतिशत में बढ़ोतरी होती हुई।

1993 से 2003 तक मतदान में गिरावट आई, लेकिन 2008 में मतदान प्रतिशत में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई। कांग्रेस की पहली सरकार 1967 में बनी। अगले विधानसभा चुनाव जो 1972 में हुए तब कांग्रेस की फिर से सत्ता में वापसी हुई।


बता दें कि राज्य की चरीलम विधानसभा सीट पर माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के उम्मीदवार रामेंद्र नारायण देबबर्मा की पिछले दिनों हुई मौत के कारण मतदान नहीं हुआ और अब इस सीट पर आगामी 12 मार्च को वोट डाले जायेंगे।

वहीं त्रिपुरा में कुल 292 उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं, जिनमें 20 महिला उम्मीदवार भी हैं। मतदान के लिए 29 हजार 700 सुरक्षाकर्मी तैनात किये गये थे और 31 हजार 402 कर्मी लगाये गये थे। माकपा 57 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकि भारतीय जनता पार्टी ने 51 पर और कांग्रेस ने 59 सीटों पर अपने उम्मीवार उतारे हैं।

अन्य वामपंथी दल आरएसपी, फॉरवर्ड ब्लॉक और भाकपा ने एक-एक सीट पर उम्मीदवार खड़े किये हैं। मतों की गिनती तीन मार्च को होगी। इस राज्य में 25 साल से माकपा का शासन है।