पूर्वोत्तर के राज्यों में 73वां स्वतंत्रता दिवस कड़ी सुरक्षा के बीच शांतिपूर्वक तरीके से मनाया गया। असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मणिपुर, मिजोरम, नगालैंड, त्रिपुरा और सिक्किम के मुख्यमंत्रियों ने तिरंगा फहराया और राज्य स्तरीय समारोहों में मार्च कर रही टुकड़ियों की सलामी ली। इन समारोहों में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को हटाये जाने के बाद देशभर के लिए सुरक्षा संबंधी परामर्श जारी किया था। पूर्वोत्तर राज्यों में इसी के अनुसार की गई कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच समारोह शांतिपूर्वक तरीके से सम्पन्न हुए और इस दौरान क्षेत्र में कहीं भी कोई अप्रिय घटना नहीं हुई।

अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने स्वतंत्रता दिवस समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि अनुच्छेद-371 के प्रावधान अरुणाचल प्रदेश सहित कुछ राज्यों के 'आर्थिक और सांस्कृतिक हित को संरक्षित' करने के लिए हैं। जम्मू-कश्मीर पर लिए साहसिक फैसले के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई देते हुए खांडू ने कहा, अनुच्छेद-371 के प्रावधान समावेशी प्रकृति के हैं, जबकि अनुच्छेद-370 प्राथमिक तौर पर विभाजनकारी है। सरकार ने जम्मू-कश्मीर के समावेशी विकास के लिए यह पहला कदम उठाया है। उन्होंने ईटानगर के इंदिरा गांधी पार्क में ध्वाजारोहण के बाद कहा, मैं अपने राज्य के लोगों को भरोसा दिलाना चाहता हूं कि अनुच्छेद-371एच के प्रावधान लागू रहेंगे और विशेष तौर पर संसद में केंद्र ने यही भरोसा दिया है. अनुच्छेद-371 एच अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल को विशेष जिम्मेदारी के साथ राज्य में कानून और व्यवस्था के मामले में कार्य करने की शक्ति देता है।

सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने कहा, 73वें स्वतंत्रता दिवस के जश्न के मौके पर, मैं हमारे राज्य को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 371(एफ) की रक्षा करने, उसका संरक्षण करने और उसे मजबूत बनाने का संकल्प लेता हूं। तमांग ने कहा कि अमित शाह ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि राज्य को मिले दर्जे से छेड़छाड़ नहीं की जाएगी।

असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने राष्ट्रीय नागरिक पंजी के मसौदे के पुन: सत्यापन के लिए उच्चतम न्यायालय में अपील के अपनी सरकार के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि यह एक त्रुटि-मुक्त दस्तावेज सुनिश्चित करने के लिए किया गया है। सोनोवाल ने कहा कि सरकार असम में रहने वाले प्रत्येक मूल भारतीय नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। शीर्ष न्यायालय ने 23 जुलाई को केंद्र और असम सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया था जिसमें 20 प्रतिशत नमूनों के पुन: सत्यापन की अनुमति मांगी गयी थी। पंजी में व्यक्तियों के गलत समावेशन और निष्कासन का पता लगाने के लिए यह अनुमति मांगी गई थी। पंजी के अंतिम संस्करण का प्रकाशन 31 अगस्त को प्रस्तावित है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उनकी सरकार राज्य के 900 से अधिक गांवों में भूमिहीन परिवारों को भूमि का अधिकार देने के लिए एक नयी नीति तैयार करेगी।

मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड के संगमा ने कोयला खनन से प्रतिबंध हटाने के लिए उच्चतम न्यायालय के निर्देश को जनता की जीत करार देते हुए कहा कि फैसले से मूल निवासियों के उनकी भूमि और खनिजों पर अधिकार बरकरार रहेंगे। शीर्ष अदालत ने तीन जुलाई को मेघालय में कोयला खनन पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) द्वारा 2014 में लगाए गए प्रतिबंध को हटाते हुए संबंधित अधिकारियों की अनुमति के अधीन निजी और सामुदायिक स्वामित्व वाली भूमि पर खनन की अनुमति दे दी थी।

मिजोरम के मुख्यमंत्री जोरमथांगा ने घोषणा की कि सामाजिक-आर्थिक विकास नीति (एसईडीपी) नयी सरकार का प्रमुख कार्यक्रम होगी। पिछले साल के अंत में राज्य में नयी सरकार बनी थी। एसईडीपी का उद्देश्य प्रमुख क्षेत्रों में प्रगति में तेजी लाना और खाद्य पदार्थों के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल कर मिजोरम को एक कल्याणकारी राज्य में बदलना है। जोरमथांगा ने कहा कि एसईडीपी का उद्देश्य सामाजिक जीवन में सुधार करना और लोगों की जिंदगी में खुशहाली तथा शांति लाना भी होगा। उन्होंने कहा, नीति में मिजोरम के सकल राज्य घरेलू उत्पाद को बढ़ाने, आम जनता की आर्थिक स्थिति में सुधार करने, रोजगार के अवसरों के सृजन, अनुकूल कारोबारी माहौल और सतत विकास पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि एसईडीपी के सफल कार्यान्वयन के उद्देश्य से नोडल एजेंसियों के रूप में काम करने के लिए कुल 14 बोर्ड बनाये गए हैं। प्रत्येक बोर्ड की अध्यक्षता एक मंत्री करेगा। उन्होंने कहा कि बांस उत्पादन और उसका प्रसंस्करण सरकार के प्रमुख कार्यक्रम के सबसे महत्वपूर्ण घटकों में से एक होगा।

नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने कहा कि नगालैंड की मूल निवासी पंजीकरण (आरआईआईएन) प्रक्रिया का मकसद राज्य के मूल लोगों और यहां स्थायी रूप से बसे लोगों की पहचान करना है जिससे 'इनर लाइन परमिट' के प्रभावी क्रियान्वयन में भी मदद मिलेगी। मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने भी अपनी सरकार की योजनाओं की जानकारी दी।