भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रो अजफर शम्शी ने कहा कि तीन तलाक पर रोक लगा कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने करोड़ों मुस्लिम महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा के लिए ऐतिहासिक कानून बनाया है।  कानून बनने के बाद तीन तलाक के मामले में लगभग 70 की गिरावट हुई है।  

बिहार, यूपी, राजस्थान आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, केरल, तमिलनाडु, असम व पश्चिम बंगाल सहित मध्य प्रदेश में तलाक के मामले में भारी गिरावट आई है. उन्होंने कहा कि 1985 से लेकर 2019 के बीच बिहार में 38617 तलाक के मामले आए थे, जबकि 2019 से 2020 में एक वर्ष के अंदर बिहार में केवल 49 सामने मामले आए है। 

2017 में आया था सुप्रीम कोर्ट का फैसला

- अगस्त 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने एक बार में तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) की 1400 साल पुरानी प्रथा को असंवैधानिक करार दिया था और सरकार से कानून बनाने को कहा था।

- सरकार ने दिसंबर 2017 में लोकसभा से मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक पारित कराया लेकिन राज्यसभा में यह बिल अटक गया था।

- विपक्ष ने मांग की थी कि तीन तलाक के आरोपी के लिए जमानत का प्रावधान भी हो।

- 2018 में विधेयक में संशोधन किए गए, लेकिन यह फिर राज्यसभा में अटक गया।

- इसके बाद सरकार सितंबर 2018 में अध्यादेश लेकर आई। इसमें विपक्ष की मांग को ध्यान में रखते हुए जमानत का प्रावधान जोड़ा गया। अध्यादेश में कहा गया कि तीन तलाक देने पर तीन साल की जेल होगी।

  आपको बता दें कि तीन तलाक (मुस्लिम महिला-विवाह अधिकार संरक्षण) बिल 30 जुलाई को राज्यसभा में पास हो गया था। ... इसके अगले दिन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने तीन तलाक बिल को मंजूरी दे दी थी। तीन तलाक कानून के तहत दोषी पुरुष को 3 साल की सजा सुनाई जा सकती है। साथ ही पीड़ित महिलाएं अपने और नाबालिग बच्चों के लिए गुजारे-भत्ते की मांग भी कर सकती हैं।