श्रीलंका की 7 राजनीतिक पार्टियों ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मदद की गुहार लगाई है। देश के उत्तरी और पूर्वी राज्यों में श्रीलंकाई तमिलों का प्रतिनिधित्व करने वाले दलों ने नरेंद्र मोदी को एक साझा पत्र लिखा है। पत्र में श्रीलंका के संविधान के 13वें संशोधन के प्रावधानों को पूरी तरह से लागू करने के लिए नरेंद्र मोदी की मदद मांगी गई है।

श्रीलंका के संविधान का 13A यानी 13वां संशोधन जुलाई 1987 के भारत-श्रीलंका समझौते के कारण अस्तित्व में आया था। इसी संशोधन के तहत प्रांतीय परिषदों की स्थापना की गई थी। लेकिन अभी तक इस संशोधन को लागू नहीं किया गया है जिससे श्रीलंका के तमिलों को सत्ता में उचित जगह नहीं मिल पाई है।

पत्र के मसौदे को 29 दिसंबर 2021 को अंतिम रूप दिया गया था। सभी पक्षों ने 6 जनवरी 2022 को इसे अनुमोदित किया था। प्रधानमंत्री को पत्र लिखने वाली राजनीतिक पार्टियों में शामिल हैं- TNA, ITAK, TELo, PLOTE, EPRLF, TMP और TNP।

पत्र में श्रीलंका के तमिल भाषी लोगों की प्रमुख समस्याओं का जिक्र है। पत्र को कोलंबो में भारतीय उच्चायोग के कार्यालयों के माध्यम से प्रधानमंत्री मोदी को भेजा जाएगा।

नरेंद्र मोदी को लिखे लंबे पत्र में राजनीतिक दलों की तरफ से लिखा गया है कि 1948 में ब्रिटेन से आजाद होने के बाद श्रीलंका के तमिल भाषी लोगों ने सभी सरकारों से उचित तरीके से सत्ता बंटवारे की मांग की है। इसके लिए कई प्रयास किए गए लेकिन अभी भी इस मसले को सुलझाया नहीं जा सका है।

पत्र में भारत का आभार जताते हुए आगे लिखा गया कि भारत सरकार पिछले 40 वर्षों से इस प्रयास में सक्रिय रूप से लगी हुई है। उचित और स्थायी समाधान खोजने के लिए हम भारत की दृढ़ प्रतिबद्धता के लिए आभारी हैं। ये प्रतिबद्धता तमिल भाषी लोगों की गरिमा, शांति सुरक्षा और आत्म-सम्मान के साथ जीने की वैध आकांक्षाओं को बल देगी। हम एक संघीय ढांचे पर आधारित राजनीतिक समाधान के लिए प्रतिबद्ध हैं जो हमारी मांगों को मान्यता देता है। तमिल भाषी लोग हमेशा से श्रीलंका के उत्तर और पूर्व में बहुसंख्यक रहे हैं।

राजनीतिक दलों ने पीएम मोदी को संबोधित अपने पत्र में श्रीलंका के सरकारों के वादों का भी जिक्र किया है। पत्र में लिखा है कि 2009 में LTTE से लड़ाई के बाद तत्कालीन राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने तत्कालीन संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून के साथ मिलकर एक संयुक्त विज्ञप्ति जारी की थी जिसमें कहा गया कि राष्ट्रपति 13वें संविधान संशोधन को लागू करवाने की दिशा में काम कर रहे हैं। श्रीलंका के विकास और शांति के लिए तमिल पार्टियों समेत सभी पार्टियों से बातचीत भी शुरू की जाएगी।