चीन के साथ सीमा पर तनातनी के बीच वायुसेना के विशेष अनुरोध पर फ्रांस भारत को राफेल लड़ाकू विमानों की डिलीवरी में तेजी करने जा रहा है और पहले बैच में 4 भेजने की जगह वे अब वे 6 लड़ाकू विमान 27 जुलाई को अंबाला की वायुसेना छावनी में भेज रहा है।

नई दिल्ली में वायुसेना की 22 से 24 जुलाई के बीच कमांडर्स कॉन्फ्रेंस के दौरान राफेल लड़ाकू विमानों की तैनाती पर चर्चा हो सकती है, जहां पर वायुसेना के टॉप सातों कमांडर इन चीफ चीन के साथ विवाद को लेकर संभावित तौर पर चर्चा करेंगे।

भारतीय वायुसेना लद्दाख सेक्टर में नए लड़ाकू विमान राफेल की तैनाती कर सकती है, ताकि सेना को मजबूती दिया जा सके। यहां पर भारत और चीन के सैनिकों के बीच विवाद जारी है और सेनाओं को हटाना एक चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया बनी हुई है। वायुसेना के इस हफ्ते होने जा रहे शीर्ष कमांडरों की बैठक से ठीक पहले पूरे मामले से वाकिफ सूत्र ने यह जानकारी दी।

भारतीय वायुसेना चाहती है कि जल्द से जल्द राफेल को ऑपरेशनाइल स्तर पर लाया जा सके और नए लड़ाकू विमानों को लद्दाख समेत जहां भी आवश्यकता हो उसे तैनात किया जा सके।

आपको बता दें कि चीन के साथ लगती सीमा पर स्थिति और पूर्वी लद्दाख और उत्तरी सीमाओं के अग्रिम ठिकानों पर जवानों की हुई तैनाती। वायु सेना ने अपने बेड़े में आधुनिक लड़ाकू विमान, जैसे- मिराज 2000, सुखोई-30, और मिग-29 को अग्रिम ठिकानों पर तैनात किया है जहां से वे दिन और रात दोनों समय ऑपरेशन कर रहे हैं।

गौरतलब है कि राफेल अत्याधुनिक हथियारों से लैस है और इसके एयरफोर्स में शामिल होने के बाद पड़ोसी देशों की तुलना में भारतीय वायुसेना को बढ़त मिलेगी।