मुजफ्फरनगर का एक 59 वर्षीय मरीज मेरठ में म्यूकोर्मिकोसिस या ब्लैक फंगस से मरने वाला पहला व्यक्ति बन गया है। वो हाल ही में कोविड से ठीक हुए थे। पिछले सप्ताह चार रोगियों में शुरू में खतरनाक फंगस रोग के लक्षण पाए गए थे और सप्ताहांत तक यह संख्या बढकऱ छह हो गई।

नेफ्रोलॉजिस्ट और रीनल ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ संदीप गर्ग ने कहा, मेरे मरीज को रीनल ट्रांसप्लांट के बाद इम्यूनो सप्रेसिव एजेंट दिया गया ताकि नई किडनी की स्वीकृति स्तर सुनिश्चित हो सके। इसके अलावा, वह मधुमेह और एक पोस्ट कोविड रोगी था जिसे स्टेरॉयड दिए जिससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता और कम हो गई। जिससे वह ब्लैक फंगस की चपेट में आ गए। हमने नागरिक अधिकारियों को उनकी मृत्यु के बारे में सूचित कर दिया है। हमारे पास अभी भी पांच से छह मरीज हैं जो ब्लैक फंगस से पीडि़त हैं।

म्यूकोर्मिकोसिस, एक फंगल संक्रमण, कोविड रोगियों में अनियंत्रित मधुमेह और लंबे समय तक गहन देखभाल इकाई में रहने के साथ पाया जा रहा है। आईसीएमआर ने हाल ही में एक परामर्श में कहा था कि फंगल संक्रमण मुख्य रूप से उन लोगों को प्रभावित करता है जो दवा ले रहे हैं जो पर्यावरणीय रोगजनकों से लडऩे की उनकी क्षमता को कम कर देता है। सलाहकार ने कहा कि इसके लक्षणों में आंखों और नाक के आसपास दर्द और लाली, बुखार, सिरदर्द, खांसी, सांस की तकलीफ, खूनी उल्टी और बदली हुई मानसिक स्थिति शामिल है आईसीएमआर, स्वास्थ्य मंत्रालय की सलाह में कहा गया है कि इस बीमारी के प्रमुख जोखिम कारकों में अनियंत्रित मधुमेह मेलेटस, स्टेरॉयड द्वारा इम्यूनोसप्रेशन, लंबे समय तक आईसीयू में रहना, घातकता और वोरिकोनाजोल थेरेपी शामिल हैं।