असम में ट्रिब्यूनल्स ने 41,033 लोगों को विदेशी घोषित किया था। राज्य सरकार के पास उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक ये लोग 1985 से गायब हैं। आंकड़ों से खुलासा हुआ है कि 1985 में असम समझौते पर हस्ताक्षर और इस साल जून के बीच 4,84,381 मामले फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल्स को रेफर किए गए। 86,489 लोगों को विदेशी घोषित किया गया। इनमें से 29,663 को वापस धकेला गया, 71 को वापस बांग्लादेश भेजा गया, 833 डिटेंशन कैंप्स में रह रहे हैं,जो निष्कासन के लिए इंतजार कर रहे हैं। 41,033 का पता नहीं चल पाया है। 

राज्य सरकार का दावा है कि ट्रिब्यूनल्स ने जब उनके खिलाफ आदेश दिया तो उनमें से ज्यादातर फरार हो गए। इनमें से शायद कुछ की मौत हो गई है। ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन(आसू) और केन्द्र के बीच असम समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे। समझौते के तहत 24 मार्च 1971 की मध्यरात्रि अवैध प्रवासियों के डिटेंशन और डिपोर्टेशन के लिए कट ऑफ डेट फिक्स की गई थी। इस वक्त फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल्स में 1,87,985 मामले लंबित हैं। फरवीर में 2,01,928 मामले लंबित थे। 

ट्रिब्यूनल्स की ओर से मामलों के निपटारे की दर में सुधार हुआ है। ट्रिब्यूनल्स की संख्या 2015 में 36 से बढ़ाकर 100 की गई थी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद राज्य सरकार ने 500 टास्क फोर्सेज गठित की। सुप्रीम कोर्ट ने अवैध प्रवासियों की जिला स्तर पर पहचान करने और उन्हें वापस भेजने का निर्देश दिया था। अप्रेल 2015 से टास्क फोर्स काम कर रही है। सर्वानंद सोनोवाल सरकार जो पिछले साल मई में सत्ता में आई थी, ने ट्रिब्यूनल्स को मजबूत करने और मामलों के निस्तारण में तेजी लाने पर बहुत जोर दिया है। इस साल जून में राज्य सरकार ने फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल्स के 15 सदस्यों को कड़ी चेतावनी जारी कर मामलों के निस्तारण की दर में सुधार लाने को कहा था। 2014 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अवैध प्रवासियों के मसले को सुलझाने का दावा किया था। 

असम में 263 किलोमीटर भारत-बांग्लादेश सीमा पर फेसिंग को लेकर संसदीय कार्य मंत्री चंद्र मोहन पटवारी ने बताया विधानसभा में बताया कि लैंड बॉर्डर का 13.38 किलोमीटर और रिवराइन का 48.11 किलोमीटर की अभी तक फेसिंग नहीं हो पाई है। असम में भारत बांग्लादेश सीमा की स्मार्ट फेंस के लिए केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने मंजूरी दी है। पटवारी ने कहा कि केन्द्रीय गृह मंत्रालय की 39 वीं उच्च स्तरीय अधिकार प्राप्त समिति ने 86.83 करोड़ के प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है, जिसे टेक्नोलॉजिकल सोल्युशन फॉर बॉर्डर डोमिनेशन कहा जाता है। मुख्यमंत्री सोनोवाल ने जुलाई 2016 में गृह मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखकर पूरे बॉर्डर पर फेंसेज के निर्माण का काम आर्मी को सौंपने का अनुरोध किया था,जिसके पास टेक्निकल एक्सपरचाइज है और जिसने भारत पाकिस्तान बॉर्डर पर सफलतापूर्वक फेंसिंग का काम पूरा किया है।