असम पब्लिक सर्विस कमीशन के भर्ती घोटाले में पुलिस ने असम सिविल सर्विस, असम पुलिस सर्विस और एलाइड सर्विसेज के 25 अधिकारियों से पूछताछ की। 

हालांकि पुलिस ने 26 अधिकारियों को तलब किया था। एक इंस्पेक्टर(टैक्सेज) पूछताछ के लिए हाजिर नहीं हुआ। द देलीग्राफ ने सूत्र के हवाले से बताया कि वह बाद में पूछताछ के लिए पेश होगा। 

पूछताछ के लिए सभी अधिकारियों को काहिलिपाड़ा स्थित असम पुलिस की स्पेशल ब्रांच के मुख्यालय में बुलाया गया था। सुबह पूछताछ शुरू हुई जो दोपहर तक चली। जिन अधिकारियों से पूछताछ हुई उनमें से 13 एसीएस अधिकारी, 7 एपीएस अधिकारी और शेष कर, श्रम और रोजगार विभागों से जुड़े थे। 

एसीएस अधिकारियों में से एक पूर्व मंत्री का बेटा है। ये अधिकारी संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा 2013 में बैठे थे और 2015 में इन्हें नियुक्ति दी गई। सूत्रों के मुताबिक प्रत्येक अधिकारी को पांच पेज लिखने के लिए कहा गया। इनकी हैंडराइटिंग के सैंपल फोरेंसिक डॉक्यूमेंट एग्जामिनर के पास विश्लेषण के लिए भेजे जाएंगे। 

सूत्रों के मुताबिक इनमें से कुछ का नाम एपीएससी चेयरमैन राकेश कुमार पॉल और आयोग के सह परीक्षा नियंत्रक पबित्र कईबारता ने लिया था। पॉल और कईबारता फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। इस तरह के आरोप हैं कि सीसीई 2013 में जो उम्मीदवार बैठे थे उनमें से ज्यादातर ने एपीएससी के अधिकारियों को घूस देकर परीक्षा पास की थी। 

पुलिस ने 3 मई को इस मामले में तीन एसीएस अधिकारियों को गिरफ्तार किया था। जिनको गिरफ्तार किया गया उनमें भास्कर दत्त दास, भास्कर चंद्र देव शर्मा और अमृत ज्योति शर्मा शामिल हैं। ये तीनों सर्किल ऑफिसर के रुप में तैनात थे। तीनों फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। असम की स्पेशल कोर्ट ने पॉल पर नार्को परीक्षण और पॉलीग्राफ टेस्ट करने संबंधी पुलिस की याचिका को खारिज कर दिया। पॉल ने 1 जून को टेस्ट कराने से इनकार कर दिया था। 

अपने आदेश में कोर्ट ने ये टेस्ट कराने के लिए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की ओर से तय किए गए दिशानिर्देशों का उदाहरण दिया। दिशानिर्देशों में कहा गया है कि आरोपी की सहमति के बगैर उस पर ये टेस्ट नहीं किए जा सकते। 2010 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अनिच्छुक व्यक्ति पर नार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट नहीं किया जा सकता। अरुप कुमार नाथ की शिकायत के आधार पर जनवरी में केस दर्ज किया गया था। 

नाथ ने आरोप लगाया था कि उन्होंने सरकारी नौकरी के लिए पहली किस्त के तौर पर पॉल को 3 लाख रुपए घूस के रूप में दिए थे। पुलिस पॉल के टेस्ट कराना चाहती थी क्योंकि उसे संदेह है कि उसने बड़ी जानकारी दबा रखी है।