इस साल होने वाली कैलाश मानसरोवर यात्रा के रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि 23 मार्च है। यानी कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए आपको 23 मार्च से पहले तक आवेदन करना होगा। बता दें कि यह यात्रा 8 जून से शुरू होकर 8 सितंबर तक चलेगी। इस बार कैलाश मानसरोवर यात्रा पारंपरिक उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे के साथ-साथ सिक्किम के नाथुला दर्रे से भी हो सकेगी।

21 दिन की यात्रा 19 दिन में

इस बार की मानसरोवर यात्रा सिक्किम के नाथुला दर्रे से होगी। इस मार्ग से यात्रा सुगम आैर सरल होने के साथ कम दिन की होगी। नाथुला दर्रे से 21 दिन की यात्रा 19 दिन में होगी। कम पैदल चलना पड़ेगा आैर यात्रा के दौरान करीब 2 लाख रुपए का खर्च आएगा। इसमें 50 हजार रुपए मध्यप्रदेश सरकार अनुदान देती है। इसके अलावा दिल्ली सरकार चार हजार रुपए के साथ चार दिन का मेडिकल कैम्प में सुविधाएं उपलब्ध करवाती है। कैलाश मानसरोवर यात्रा का पंजीयन होने के एक माह बाद विदेश मंत्रालय लाटरी से चयन करता है। हृदय व दमा श्रद्धालु यात्रा नहीं कर सकते। डॉक्टर व विवाहित जोड़ों को प्राथमिकता होती है।


पिछले साल चीन ने नहीं दी थी अनुमति

पिछले साल कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए चीन ने अनुुमति नहीं दी थी। चीन ने इसके पीछे तर्क ये दिया था कि नाथूला मार्ग पर सुरक्षित और सुचारू यात्रा के लिए स्थिति अच्छी नहीं है। वैसे आपको बता दें कि कैलाश मानसरोवर की यात्रा के दो पारंपरिक मार्गों में पहला उत्तराखंड का लिपुलेख दर्रा का मार्ग है तो दूसरा सिक्किम का नाथूला दर्रा। पिछले महीने विदेश राज्य मंत्री वी.के. सिंह ने कहा था कि चीन और भारत के विदेश मंत्रियों के बीच वार्ता के बाद पड़ोसी देश ने नाथूला दर्रे से यात्रा की अनुमति दे दी है।

1580 श्रद्धालुओं का लॉटरी से चयन होगा

इस बार 60 यात्रियों के 18 जत्थे उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे से यात्री रवाना होंगे। नाथुला दर्रे से 50 लोगों के 10 जत्थे रवाना करने की योजना है। यात्रा 8 जून से शुरू होगी। पिछले साल 16 जून से यात्रा शुरू हुई थी लेकिन डोकलाम में चीन और भारत के बीच शुरू हुए गतिरोध के बाद नाथुला के रास्ते यात्रा को बीच में ही स्थगित करना पड़ा था।

यात्रा के दो रास्ते 
इस साल लिपुलेख के रास्ते से यात्रा करने पर 1.6 लाख रुपए प्रति यात्री खर्च आने का अनुमान है। जबकि नाथुला दर्रे के रास्ते यात्रा पर दो लाख रुपये का खर्च आएगा। बता दें कि लिपुलेख दर्रे के रास्ते में श्रद्धालुओं को पैदल चलना पड़ता है। जबकि नाथुला मार्ग पर वाहन से जा सकेंगे। नाथुला रास्ते से 21 दिन में यात्रा पूरी होगी, इसमें यात्रा तैयारियों के लिए दिल्ली में तीन दिन का ठहराव शामिल है।