देश में आठ अगस्त के बाद हुई भारी बारिश के कारण बाढ़ एवं भूस्खलन से प्रभावित 12 राज्यों में हुए नुकसान का जायजा लेने के लिए अलग-अलग केंद्रीय टीमों ने संबंधित राज्यों का दौरा किया है। केंद्र सरकार के एक विशेषज्ञ दल के सदस्यों ने कर्नाटक के कोडागु जिले में इस माह के पहले और दूसरे सप्ताह में आयी भीषण बाढ़ से हुए नुकसान का जायजा लेने के लिए मंगलवार को जिले का दौरा किया तथा जिला प्रशासन से जानकारियां एकत्र की। विशेषज्ञ दल ने उपायुक्त एनीस कनमनी जॉय, जिला पंचायत की मुख्य कार्यकारी अधिकारी के लक्ष्मी प्रिया, जिला प्रभारी सचिव अंबु कुमार और अन्य प्रतिनिधियों से मुलाकात की।


उपायुक्त ने दल को जानकारी दी कि प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक कोडागु में लगभग 600 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। लगभग 1़18 लाख हेक्टेयर जमीन पर खड़ी फसल पानी में डूबकर तबाह हो गयी जिनमें एक लाख हेक्टेयर में कॉफी, 6350 हेक्टेयर में काली मिर्च, इलायची 1806 हेक्टेयर और 380 हेक्टेयर में लगी सब्जियां बर्बाद हो गयीं। जिले में 153 मकान ढह गये और 336 मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गये। विशेषज्ञ दल ने लेल्याहुदिकेरी, कराडिगोडु, कुम्बरागुंडी और सिद्दापुरा में बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया। सदस्यों ने बाढ़ प्रभावितों की तकलीफें भी सुनी। उसके बाद उन्होंने मकुट्टा रोड का निरीक्षण किया।


दल के सदस्यों में केंद्रीय वित्त विभाग के निदेशक एस मीणा, कृषि सहयोग एवं कृषक कल्याण संयुक्त निदेशक पुन्नुस्वामी और केंद्रीय जल संसाधन विभाग के अधीक्षण अभियंता जितेंद्र पंवार शामिल हैं। इस बीच कांग्रेस नेता एवं वायनाड से सांसद राहुल गांधी ने मंगलवार को जिले के बाढ़ एवं भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। श्री गांधी बुधवार और गुरुवार को भी जिले के विभिन्न बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा करेंगे। गांधी ने आठ अगस्त को आयी भीषण बाढ़ और उसके बाद हुए भूस्खलन के बाद दूसरी बार इस जिले का दौरा किया है। वह दोपहर में मनंतावाडी पहुंचे और तलापुझा के पास चुंगम स्थित सेंट थॉमस चर्च में बने राहत शिविर का दौरा किया।


उन्होंने बाढ़ प्रभावितों को राहत सामग्रियां भी वितरित की। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष इसके बाद वालड में बाढ़ प्रभावित इलाकों में गये और पीड़तिों से मुलाकात की। उन्होंने माखियाड के हिलफेस स्कूल ऑडिटोरियम में आयोजित एक अनौपचारिक कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों से पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण कार्य पर बातचीत की। उन्होंने चोमाडिपोयिल कॉलोनी और मनंतावाडी के पास चेरुपुझा में भी बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया।


पंजाब नंबरदार यूनियन ने बाढ़ प्रभावितों की सहायता में अपना योगदान देते हुये अपने तीन माह का वेतन 14.16 करोड़ रूपये मुख्यमंत्री राहत कोष में देने का फैसला किया है। राजस्व मंत्री जी एस कांगड़ ने बताया कि यूनियन का एक प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को उनसे मिला जिसमें यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष गुरपाल ङ्क्षसह सामरा, कार्यकारी अध्यक्ष सुरजीत ङ्क्षसह, महासचिव लाभ ङ्क्षसह करैल सहित इसके पदाधिकारी शामिल थे। इस बीच राज्य के अनऐडिडड कॉलेजों की विभिन्न 12 एसोसिएशनों की ज्वाइंट एक्शन कमेटी ने बाढ़ पीड़तिों की सहायता के लिये अपने सभी संस्थानों के सभी कर्मचारियों का एक दिन का वेतन देने का फैसला किया है। ये सभी मुख्यमंत्री राहत कोष में अपना एक दिन का वेतन देंगे।


सरकारी प्रवक्ता ने आज यहां बताया कि एसोसिएशनों ने बाढ़ प्रभावित इलाकों के आस-पास अपने कॉलेजों में अस्थायी राहत शिविर बनाने की पेशकश की है ताकि बाढ़ पीड़तिों को धक्के न खाने पड़ें। मुख्य सचिव करन अवतार ङ्क्षसह ने इस पहल का स्वागत करते हुये कहा है कि इन कॉलेजों का प्रबंधन बेहतर तालमेल के लिये बाढ़ प्रभावित जिला उपायुक्तों से संपर्क कर सकता है। इस संकट की घड़ी में यह बढ़ी मदद है। पंजाब के जालंधर जिले के बाढ़ प्रभावित गांवों में जलस्तर में कमी आने के बाद जिला प्रशासन ने ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और ट्रकों के माध्यम से पशुओं के लिए भोजन, पानी, दवाइयों और चारे के रूप में राहत सामग्री की आपूर्ति करने का फैसला किया है।


उपायुक्त जालंधर वरिंदर कुमार शर्मा ने मंगलवार को कहा बाढ़ प्रभावित कई गांवों में जलस्तर कम हो गया है। ऐसे में नावों से उन तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित गांवों के लोगों के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और ट्रकों के माध्यम से राहत सामग्री भेजने के लिए एक नई रणनीति अपनाई है। उन्होने कहा कि अब इन गांवों में सड़कों के माध्यम से खाद्य और नागरिक आपूर्ति, स्वास्थ्य, पशुपालन और अन्य अधिकारियों के दल भेजे जाएंगे। जो वाहनों द्वारा दवाओं, राशन, चारे और अन्य सामग्री की आपूर्ति करेंगे। उन्होंने कहा कि जिन स्थानों पर जलस्तर अधिक है वहां राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल की नौकाओं से राहत अभियान जारी रहेगा।

उपायुक्त ने कहा कि आज तक 1850 खाने के पैकेट जिसमें 10 किलो आटा, पानी की बोतलें, एक किलो चीनी, एक किलो नमक, 250 ग्राम चाय, तीन तरह के मसाले और दूध पाउडर के पैकेट, 29 हजार लीटर पानी, 600 किलो सूखा दूध पाउडर, 2000 तिरपाल, 700 मच्छरदानी बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए नावों के माध्यम से आपूर्ति की गई है। श्री शर्मा ने कहा कि बाढ़ प्रभावित गाँवों में फंसे मवेशियों के इलाज के लिए, पशुपालन विभाग की पशु चिकित्सा टीमें घर-घर जाकर पशुओं का समुचित इलाज कर रही हैं। उन्होंने कहा कि विभाग ने 22 अगस्त से गांव के मोबाइल नावों पर घर-घर जाकर लगभग 3000 बीमार जानवरों का इलाज किया है।


मौसम विभाग के मुताबिक दक्षिण-पश्चिम मानसून पश्चिमी मध्य प्रदेश और केरल में अति सक्रिय है और पूर्वी राजस्थान, पूर्वी मध्य प्रदेश, गुजरात क्षेत्र और तटीय कर्नाटक में सक्रिय है, जबकि असम, मेघायल, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, उपहिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, आंध्र प्रदेश और उत्तरी कर्नाटक के आंतरिक हिस्सों में शिथिल पड़ गया है। विभाग के अनुसार गुजरात के विभिन्न क्षेत्रों में अगले 12 घंटों केे दौरान अतिवृष्टि होने के आसार हैं जबकि पूर्वी राजस्थान, अंडमान- निकोबार द्वीपसमूह, केरल तथा माहे के अलग-अलग हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है।


पश्चिमी राजस्थान, मध्य प्रदेश, ओडिशा, सौराष्ट्र, कच्छ, मध्य महाराष्ट्र, तटीय और दक्षिण कर्नाटक के आंतरिक हिस्सों, लक्षद्वीप, तमिलनाडु, पुड्डुचेरी और काराईकल के अलग-अलग हिस्सों में भारी बारिश होने के अनुमान हैं। झारखंड, उप हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा के अलग-अलग हिस्सों में गरज के साथ छींटें पड़ सकते हैं। दक्षिण-पश्चिम अरब सागर में सोमालिया के तटों और अरब सागर में 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती है। बंगाल की खाड़ी के पूर्वी तथा मध्य हिस्से और इससे सटे उत्तर अंडमान समुद्र में इसी तरह का मौसम रहने के आसार हैं।


विभाग ने अगले 12 घंटों के दौरान मछुआरों को समुद्र में नहीं उतरने की सलाह दी है। इस बीच देश के विभिन्न हिस्सों में हुई भारी बारिश और बादल फटने के कारण आई बाढ़ तथा भूस्खलन की घटनाओं में अब तक 386 लोगों की मौत हुई है जबकि 23 अन्य लापता हैं। इस वर्ष बारिश एवं बाढ़ से उत्तर भारत के हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब सबसे गंभीर रूप से प्रभावित हुए हैं जबकि इससे पहले के दौर में हुई बारिश और बाढ़ से दक्षिण भारत के केरल और कर्नाटक सबसे गंभीर तौर पर चपेट में आये थे। हिमाचल में बारिश, बाढ़ एवं भूस्खलन की घटनाओं में अब तक 63 लोगों तथा उत्तराखंड में 62 लोगों की मौत हुई है जबकि छह अन्य लापता हैं। दक्षिण भारत के केरल में अब तक 125 लोगों की मौत हुई जबकि 17 लोग अब भी लापता हैं, कर्नाटक में 62, गुजरात में 35, महाराष्ट्र में 30, ओडिशा में आठ तथा आंध्र प्रदेश में नाव पलटने से एक लड़की की मौत हो चुकी है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल में भारी बारिश के बीच बिजली गिरने से कम से कम आठ लोगों की जानें गयी हैं।