अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) में दाखिले के लिए कोचिग कर रहा कक्षा चार का बच्चा पढ़ाई का बोझ नहीं सह पाया। बच्चा अलीगढ़ स्थित कोचिग सेंटर से भागकर गाजियाबाद रेलवे स्टेशन पर पहुंच गया। कोचिग सेंटर में बच्चे को प्रतिदिन पढ़ाई का लक्ष्य दिया जाता था। वह लक्ष्य पूरा नहीं होने पर उसे बेरहमी से पीटा जाता था। दो दिन तक वह अलीगढ़ रेलवे स्टेशन पर भूखा-प्यासा भटकता रहा। शुक्रवार को जीआरपी गाजियाबाद ने बच्चे को बरामद कर परिजनों को सौंप दिया है। अब परिजन कोचिग सेंटर संचालक के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराने जा रहे हैं।


अलीगढ़ के खैर थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी 11 वर्षीय बच्चा निजी स्कूल में पढ़ता था। बच्चे के पिता बीएसएफ में हैं। वर्तमान में उनकी त्रिपुरा में तैनाती है। परिजनों की इच्छा थी कि उनके बच्चे का दाखिला अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में हो जाए। लिहाजा इसके लिए डेढ़ साल पहले उन्होंने कोचिग सेंटर की तलाश शुरू की। एक परिचित ने उन्हें अलीगढ़ की बैंक कालोनी स्थित एक कोचिग सेंटर में बच्चे को पढ़ाने की सलाह दी। इसके बाद परिजनों ने इस कोचिग सेंटर में बच्चे का दाखिला करा दिया। कोचिग सेंटर संचालक ने दो साल बाद कक्षा 6 में दाखिला कराने का दावा किया।

पूछताछ में बच्चे ने जीआरपी से बताया कि कोचिंग में उसे प्रतिदिन पढ़ाई करने का लक्ष्य दिया जाता था। लक्ष्य पूरा नहीं होने पर बेरहमी से उसकी पिटाई की जाती थी और खाना नहीं दिया जाता था। बच्चा बुधवार को कोचिग सेंटर से बाजार में चाऊमीन खाने के बहाने से भाग निकला। यहां से वह अलीगढ़ रेलवे स्टेशन पर पहुंचा। उसके पास महज 20 रुपये थे। भूख लगने पर उसने 20 रुपये के बिस्किट खा लिए। वह दो दिन तक भूखा-प्यासा रेलवे स्टेशन पर भटकता रहा। बृहस्पतिवार देर रात को बच्चा ट्रेन में बैठकर गाजियाबाद रेलवे स्टेशन पर पहुंच गया। यहां वह जीआरपी को रोते हुए मिला। जीआरपी ने बच्चे से उसके घर का फोन नंबर लेकर कॉल कर जानकारी दी।
 
बच्चे के फौजी पिता त्रिपुरा में तैनात हैं। बेटे के लापता होने की सूचना मिलते ही वह त्रिपुरा से अलीगढ़ पहुंचे। माता-पिता समेत पूरा परिवार बच्चे तलाश में जुटा हुआ था। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। जब शुक्रवार को परिजनों ने बच्चे को घर पहुंचकर नहलाया तो उसकी कमर पर पिटाई के निशान थे। बच्चे की मां का कहना है कि वह कोचिग सेंटर संचालक के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराएंगे।
 
बच्चे ने जीआरपी को बताया कि कोचिग सेंटर में सभी बच्चों पर खेलने, टीवी देखने और इंटरनेट के इस्तेमाल करने पर पाबंदी लगा रखी है। कोचिग सेंटर में ही बच्चों के भोजन की व्यवस्था की जाती है। बच्चों को पौष्टिक भोजन नहीं दिया जाता। सेंटर संचालक बदले में परिजनों से मोटी फीस वसूलता है। यहां करीब 85 बच्चे कोचिग ले रहे हैं।
 
जब परिजन दाखिले के लिए कोचिग सेंटर पहुंचे थे तो वहां पर उनसे स्कूल से बच्चे का नाम कटवाने के लिए कहा गया। उसके झांसे में आकर परिजनों ने बच्चे का स्कूल छुड़वा दिया। उसने दावा किया था कि यहां कोचिग के बाद दो साल के भीतर यूनिवर्सिटी में उसका दाखिला करा देगा।
आप को बता दें की  बच्चा सुबह प्लेटफार्म नंबर तीन पर जीआरपी को रोता हुआ मिला था। बच्चे को परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया है। बच्चा पढ़ाई और शिक्षकों की पिटाई के कारण भागा था।