वरिष्ठ अल्फा नेता ज्योतिमर्य भराली, बाबुल गोगोई, रसीद भराली, जान असम सहित संगठन के 11 कैडरों के दल के केंद्रीय गुप्तचर संस्था 'रा' के सामने समर्पण करने की जानकारी मिली है।

सूत्रों के अनुसार म्यामांर के हुंकवैली टागा बस्ती स्थित उल्फा के मुख्यालय से ग्यारह सदस्यों के फरार होने का खबर है। जानकारी के मुताबिक डिब्रूगढ़ के घोड़ामारी के वरिष्ठ उल्फा नेता बाबुल गोगोई ने लंबे समय से बिमारी के चलते एक महीने पहले ही म्यांमार स्थित उल्फा मुख्यालय छोड़ दिया। इसके बाद रसीद भराली और ज्योतिर्मय भराली के साथ बरडुमसा के थाना प्रभारी भास्कर कलिता की गोली मारकर हत्या करने के आरोपी जान असम के भी म्यांमार छोड़ कर किसी गुप्त स्थान में शरण लेने की सूचना है।हालांकि केंद्रीय गुप्तचर संस्था 'रा' ने उल्फा स्वाधीन के सदस्यों को कहां रखा है, इसकी जानकारी नहीं मिली है। एक अन्य सूत्र के अनुसार तिनसुकिया या दिनजान सेना शिविर में सभी उल्फा सदस्यों से पूछताछ की जा रही है। बता दें कि 15 अगस्त 2004 को धेमाजी के काॅलेज फील्ड में धमाके हुआ था, जिसमें एक दर्जन से अधिक बच्चों की जान गई थी। इस मामले के मुख्य आरोपी रसीद भराली भी उल्फा स्वाधीनता से अलग होकर गुप्तचर संस्था की शरण में हैं।रसीद भराली के निर्देश पर ही स्वाधीनता दिवस के कार्यक्रम में उल्फा ने बम धमाका किया था। इस घटना के बाद धेमाजी कांड का मुख्य आरोपी रसीद भराली असम छोड़कर म्यामांर में छिपा हुआ था। परेश बरूवा का साथ छोड़ कर गुप्तचर संस्था के सामने समर्पण करने वाले ग्यारह लोगों के बारे में उल्फा स्वाधीन की तरफ से अब तक कोई बयान नहीं आया है।
उल्फा सदस्यों के समर्पण की पूरी कहानी एक या दो दिन में औपचारिक रुप से सामने आ जाएगी। बताया जा रहा है कि आपसी कलह के कारण इन उल्फा नेताओं ने म्यांमार छोड़ा है।